EXPOSE NOW: सिस्टम सोया रहा, पत्रकार कतराते रहे… पर एक ‘गुरु’ की ज़िद ने खोल दी NEET 2026 धांधली की पोल!

सीकर। जब लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हो और सिस्टम अपनी आंखें मूंद ले, तब एक शिक्षक की हिम्मत ही उम्मीद की आखिरी किरण बनती है। आज Expose Now आपको बता रहा है राजस्थान के सीकर के उस टीचर की कहानी, जिसने हार नहीं मानी—भले ही पुलिस ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया और मीडिया ने पल्ला झाड़ लिया।

कहानी की शुरुआत: एक ‘गेस पेपर’ और उड़ती हुई नींद:-

3 मई की शाम, परीक्षा खत्म हो चुकी थी। सीकर के एक शिक्षक को उनके मकान मालिक ने हाथ से लिखा एक कागज़ थमाया। सवाल था— “ज़रा देखिए, क्या ये असली है?” शिक्षक ने जैसे ही उन सवालों को NEET UG 2026 के पेपर से मिलाया, उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। केमिस्ट्री के 90 सवाल और बायोलॉजी के कई पन्ने हूबहू वही थे जो परीक्षा में आए थे। यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश की आहट थी।

पुलिस का ठंडा रुख और पत्रकारों की बेरुखी:-

शिक्षक तुरंत उद्योग नगर पुलिस थाना पहुंचे। रात के 1:30 बज रहे थे। हाथ में सबूतों का बंडल था, लेकिन आरोप है कि खाकी ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। SHO का दावा है कि उन्होंने कोरा कागज़ दिया था, पर शिक्षक की घबराहट और सिस्टम के ढुलमुल रवैये के बीच सच कहीं दबने ही वाला था। यही नहीं, कुछ पत्रकारों ने भी इसे ‘हल्के’ में लिया। जब हर दरवाज़ा बंद दिखा, तो शिक्षक ने हार मानने के बजाय लड़ने का रास्ता चुना।

“मेरा मोबाइल ले लो, पर जांच करो” – NTA को सीधी चुनौती:-

शिक्षक ने अपने कोचिंग सेंटर के मालिक से चर्चा की और सीधे NTA (National Testing Agency) को ईमेल दाग दिया। यह कोई साधारण ईमेल नहीं था, बल्कि एक खुली चुनौती थी। “मैं फॉरेंसिक जांच के लिए अपना मोबाइल सौंपने को तैयार हूं। मेरे पास 60 पन्नों की वो PDF है, जो इस लीक का कच्चा चिट्ठा है। इसकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराइए!”

क्लीन चिट और CBI तक पहुंची जांच:-

शुरुआती जांच के बाद शिक्षक को पाक-साफ पाया गया है। उन्हें वह पेपर परीक्षा के बाद मिला था, जिससे साबित हुआ कि वे इस रैकेट का हिस्सा नहीं, बल्कि इसे बेनकाब करने वाले व्हिसलब्लोअर (Whistleblower) थे। शिक्षक की इस पहल के बाद ही मामला राजस्थान SOG से होता हुआ अब CBI के पास है। अगर वह शिक्षक उस रात पुलिस थाने नहीं जाता या चुप बैठ जाता, तो हज़ारों मेधावी छात्रों का हक छीन लिया जाता।

Expose Now का सवाल:-

अगर एक आम शिक्षक को पेपर लीक की भनक लग सकती है, तो करोड़ों के बजट वाली एजेंसियां परीक्षा से पहले इन गिरोहों को क्यों नहीं पकड़ पातीं? आखिर कब तक छात्रों के भविष्य के साथ यह “गेस पेपर” वाला खेल चलता रहेगा?

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