राजस्थान की बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) के लिए वित्त वर्ष 2025-26 एक ऐतिहासिक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है। बरसों से भारी घाटे और कर्ज के बोझ तले दबी इन कंपनियों ने अपने संयुक्त कर्ज में 1,352 करोड़ रुपये की बड़ी कटौती करने में सफलता हासिल की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में डिस्कॉम पर कुल कर्ज 97,970 करोड़ रुपये था, जो अब घटकर 96,618 करोड़ रुपये रह गया है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के नेतृत्व में हुए इस वित्तीय सुधार के पीछे मुख्य कारण बेहतर प्रबंधन, खर्चों पर नियंत्रण और राज्य के इतिहास में पहली बार हुई 100% से अधिक राजस्व वसूली को माना जा रहा है।
इस वित्तीय सुधार में अजमेर डिस्कॉम सबसे आगे रहा है, जिसने अकेले अपनी देनदारियों में 935 करोड़ रुपये की कमी की। जयपुर डिस्कॉम ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 644 करोड़ रुपये का कर्ज कम किया। हालांकि, जोधपुर डिस्कॉम के सामने अभी भी कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं, जहां कर्ज में मामूली बढ़ोतरी देखी गई है। कर्ज कम करने की इस प्रक्रिया में पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (REC) से मिली 8.75% की रियायती ब्याज दर ने संजीवनी का काम किया। पुरानी महंगी ब्याज दरों में 1.40% तक की कटौती होने से डिस्कॉम को पुराने कर्जों को चुकाने में काफी राहत मिली।
प्रशासनिक स्तर पर भी इस बार कड़े कदम उठाए गए। पहली बार तीनों डिस्कॉम—जयपुर (102%), अजमेर (100.23%) और जोधपुर (100.96%)—ने लक्ष्य से अधिक राजस्व संग्रह किया। जयपुर डिस्कॉम ने विशेष अभियान चलाकर सभी खराब मीटरों को बदल दिया, जिससे ‘एवरेज बिलिंग’ की समस्या खत्म हुई और विभाग को 1.9 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बचत हुई। इस ‘पॉलिटिकल और एडमिनिस्ट्रेटिव विल’ के कारण राजस्थान की बिजली कंपनियां अब धीरे-धीरे आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं, जो आने वाले समय में उपभोक्ताओं के लिए बेहतर सेवाओं और बिजली दरों में स्थिरता का संकेत है।
