असम के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने सरमा जिन्होंने दोहराया कार्यकाल; भाजपा की ‘हैट्रिक’ से पूर्वोत्तर में बढ़ी धमक

गुवाहाटी। असम की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दिग्गज नेता हिमंत बिस्व सरमा ने लगातार दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया है। वे असम में लगातार दो बार मुख्यमंत्री बनने वाले पहले गैर-कांग्रेसी नेता बन गए हैं। विधानसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन की प्रचंड जीत के बाद आयोजित इस भव्य समारोह ने पूर्वोत्तर में भाजपा की मजबूत पकड़ को एक बार फिर साबित कर दिया है।

भव्य शपथ ग्रहण और वीआईपी मेहमान

गुवाहाटी में आयोजित इस समारोह में देशभर के बड़े राजनीतिक दिग्गजों का जमावड़ा लगा। राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने हिमंत बिस्व सरमा को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इन चार मंत्रियों ने भी ली शपथ

मुख्यमंत्री के साथ एनडीए के चार अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली, जिनमें अनुभव और क्षेत्रीय समीकरणों का तालमेल देखने को मिला:

  • रामेश्वर तेली (BJP): पूर्व केंद्रीय मंत्री, जो अब राज्य की सक्रिय राजनीति में वापसी कर रहे हैं।
  • अजयांता नेओग (BJP): पिछली सरकार में वित्त विभाग की कमान संभाल चुकी हैं।
  • अतुल बोरा (AGP): असम गण परिषद के नेता और पूर्व कृषि मंत्री।
  • चरण बोरो (BPF): बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के प्रमुख चेहरा और पूर्व परिवहन मंत्री।

भाजपा की ‘हैट्रिक’ और स्थिरता का संदेश

असम में यह एनडीए सरकार का लगातार तीसरा कार्यकाल है। साल 2016 में सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में पहली बार भाजपा गठबंधन की सरकार बनी थी, जिसके बाद 2021 में सरमा ने कमान संभाली और अब 2026 में दोबारा सत्ता हासिल की है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने मंत्रियों को टीम में बनाए रखना राज्य में प्रशासनिक निरंतरता और स्थिरता के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

शपथ ग्रहण समारोह के मद्देनजर पूरे गुवाहाटी शहर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। मुख्य सचिव रवि कोटा की देखरेख में सुरक्षा और प्रोटोकॉल के पुख्ता इंतजाम किए गए। केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों ने चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी ताकि आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

यह जीत न केवल हिमंत बिस्व सरमा के बढ़ते कद को दर्शाती है, बल्कि विकास और हिंदुत्व के एजेंडे पर राज्य की जनता की मुहर को भी पुख्ता करती है।

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