चुनाव कराने में सरकार की आनाकानी पर भड़का हाईकोर्ट, कहा- “रवैया ठीक नहीं, पहले ही दे चुके पर्याप्त समय”

जयपुर: राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव कराने को लेकर राज्य सरकार और न्यायपालिका के बीच तल्खी बढ़ गई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने चुनाव टालने के लिए सरकार द्वारा दी गई दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सरकार के ढुलमुल रवैये पर सख्त नाराजगी जाहिर की और कहा कि प्रशासन को पहले ही पर्याप्त अवसर दिया जा चुका है।

मौसम का बहाना और कोर्ट की सख्ती

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अजीबोगरीब तर्क पेश किए गए। सरकार ने कहा कि राजस्थान का एक बड़ा हिस्सा रेगिस्तानी है, जहाँ जून में भीषण लू (Heatwave) चलती है और जुलाई में मानसून (Rain) शुरू हो जाता है। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराना बेहद कठिन होगा।

बेंच इन तर्कों से बिल्कुल भी सहमत नहीं दिखी। कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया कि इस तरह के प्राकृतिक कारणों का हवाला देकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए नहीं रोका जा सकता।

OBC आयोग की रिपोर्ट पर खिंचाई

सरकार की ओर से महाधिवक्ता (AG) राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि ओबीसी (OBC) आयोग की रिपोर्ट न मिलने के कारण आरक्षण तय करने में देरी हुई। साथ ही वार्डों के आंतरिक सीमांकन पर हाईकोर्ट के दो अलग-अलग फैसलों को भी देरी की वजह बताया। इस पर कोर्ट ने तीखा सवाल पूछा—

“अगर आदेश निकायों के संबंध में था, तो पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए गए? ओबीसी आयोग क्या कर रहा है, यह जानकारी हमारे सामने स्पष्ट नहीं है।”

क्या है पूरा मामला?

हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को एक साथ 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि:

  • पंचायतों और निकायों का परिसीमन 31 दिसंबर 2025 तक पूरा कर लिया जाए।
  • चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 तक संपन्न करा ली जाए।

चूंकि सरकार और चुनाव आयोग इन डेडलाइन्स को पूरा करने में विफल रहे हैं, इसलिए अब कोर्ट की शरण में जाकर और समय मांग रहे हैं।

18 मई को ‘अवमानना’ पर नजर

अदालत ने फिलहाल मुख्य मामले में जजमेंट रिजर्व (सुरक्षित) रख लिया है। हालांकि, सरकार की मुश्किलें यहीं कम नहीं होतीं। इसी मामले में कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने पर एक अवमानना याचिका (Contempt Petition) भी दायर है, जिस पर 18 मई को सुनवाई होनी है।

अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के सुरक्षित फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि प्रदेश में जमीनी लोकतंत्र के चुनाव कब होंगे या सरकार को और मोहलत मिलेगी।

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