कोटा। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) कोटा ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पंचायत समिति कोटड़ी, जिला भीलवाड़ा के पूर्व विकास अधिकारी (BDO) रामविलास मीणा के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी अधिकारी पर पदस्थापन की प्रतीक्षा (APO) में होने के बावजूद पिछली तारीखों में बिल पास कर ठेकेदारों से अवैध राशि वसूलने का आरोप है।
गोपनीय सूचना पर हैंगिंग ब्रिज टोल पर नाकेबंदी
एसीबी कोटा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय कुमार स्वर्णकार को 10 मार्च 2026 को गोपनीय सूचना मिली थी कि विकास अधिकारी रामविलास मीणा, जिन्हें कोटड़ी (भीलवाड़ा) से एपीओ कर दिया गया है, वे ठेकेदारों से रिश्वत की बड़ी राशि लेकर अपनी निजी स्विफ्ट कार (VDI) से कोटा आ रहे हैं। सूचना की गंभीरता को देखते हुए एसीबी की टीम ने कोटा-चित्तौड़गढ़ रोड स्थित हैंगिंग ब्रिज टोल नाके पर नाकेबंदी की।
स्विफ्ट कार से बरामद हुई ₹1,55,275 की नकदी
रात करीब 9:17 बजे जब संदिग्ध स्विफ्ट कार टोल नाके पर रुकी, तो एसीबी टीम ने उसे घेर लिया। कार में विकास अधिकारी रामविलास मीणा अपने साले बन्टेश कुमार के साथ मौजूद थे। तलाशी के दौरान कार के डैशबोर्ड से ₹1,00,000 (500 के दो बंडल) और पीछे की सीट पर रखे बैग से ₹50,000 की नकदी बरामद हुई। इसके अतिरिक्त मीणा की जामा तलाशी में ₹5,275 मिले। कुल मिलाकर ₹1,55,275 की संदिग्ध राशि जब्त की गई।
नकदी के स्रोत पर अधिकारी के विरोधाभासी बयान
पूछताछ के दौरान आरोपी बीडीओ ने नकदी के स्रोत के बारे में कई बार अपने बयान बदले। पहले उन्होंने दावा किया कि ₹1 लाख उन्होंने प्रधान करण सिंह बेलवा से उधार लिए थे। बाद में उन्होंने बयान बदलकर कहा कि यह राशि रामस्वरूप गुर्जर (ठेकेदार) से ली गई है। एसीबी द्वारा जब प्रधान करण सिंह से फोन पर सत्यापन किया गया, तो उन्होंने किसी भी प्रकार का उधार देने से इनकार कर दिया। वहीं, रामस्वरूप गुर्जर ने भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
दस्तावेज और साक्ष्य जब्त
एसीबी ने न केवल नकदी जब्त की, बल्कि कार से विभागीय पत्रावलियां, कार्यभार हस्तांतरण आदेश और ₹50,000 की एक दान रसीद भी बरामद की। आरोपी अधिकारी के कोटा स्थित निवास (हाड़ौती कॉलोनी) की भी तलाशी ली गई।
कानूनी कार्यवाही और जाँच
एसीबी ने प्रथम दृष्टया आरोपी रामविलास मीणा के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(b) और 13(2) के तहत मामला प्रमाणित माना है। इस प्रकरण की विस्तृत जाँच (अनुसंधान) के लिए कोटा एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकुल शर्मा को अनुसंधान अधिकारी (I.O.) नियुक्त किया गया है।
