एलपीजी विपणन कंपनियों ने घरेलू गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी को लेकर एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है, जिसका उद्देश्य सरकारी सहायता के दुरुपयोग को रोकना और पारदर्शिता लाना है। नए नियमों के तहत अब उन उपभोक्ताओं को सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा जिनकी वार्षिक सकल कर योग्य आय 10 लाख रुपये या उससे अधिक है। तेल कंपनियों ने आयकर विभाग (सीबीडीटी) के डेटाबेस के साथ उपभोक्ताओं के विवरण का सत्यापन शुरू कर दिया है। पहचान किए गए ऐसे उपभोक्ताओं को 9 मई से एसएमएस भेजे जा रहे हैं। यदि किसी उपभोक्ता को इस श्रेणी में रखे जाने पर आपत्ति है, तो उन्हें मैसेज मिलने के 7 दिनों के भीतर टोल-फ्री नंबर 1800-2333-555 या कंपनी के पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करानी होगी, अन्यथा उनकी सब्सिडी स्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी।
सब्सिडी में सुधार के इस अभियान के तहत मृतकों और फर्जी नाम पर चल रहे गैस कनेक्शनों पर भी गाज गिरने वाली है। कंपनियां आधार डेटाबेस की मदद से मृत उपभोक्ताओं के कनेक्शनों की पहचान कर रही हैं। ऐसे मामलों में परिजनों को सूचित किया गया है कि वे 30 दिनों के भीतर कनेक्शन को परिवार के किसी पात्र सदस्य के नाम पर स्थानांतरित करवा लें। यदि निर्धारित समय सीमा में नाम परिवर्तन नहीं किया जाता है, तो उस गैस कनेक्शन को स्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा। कोटा जिले की बात करें तो यहाँ के करीब ढाई लाख कनेक्शनों में से लगभग 40 हजार उपभोक्ता इस नए दायरे में आने की संभावना है, जिनमें उद्यमी, व्यवसायी और उच्च आय वाले सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से केवल पात्र और जरूरतमंद परिवारों, विशेषकर उज्ज्वला और बीपीएल कार्ड धारकों को ही सब्सिडी का लाभ सुनिश्चित हो सकेगा। डेटाबेस से सत्यापन की प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित की जा रही है और एसएमएस के माध्यम से लिंक भेजकर उपभोक्ताओं से उनकी जानकारी अपडेट करने को कहा जा रहा है। हाड़ौती और कोटा एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के अनुसार, तेल कंपनियां रिकॉर्ड की शुद्धता बनाए रखने के लिए अब सीधे पोर्टल और मोबाइल एप के जरिए सत्यापन और स्थानांतरण का विकल्प प्रदान कर रही हैं, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के फर्जीवाड़े की गुंजाइश न रहे।
