-रिटायरमेंट के दिन भी जारी रहा ‘वसूली’ का खेल, आर.के. मीणा के कार्यकाल ने तोड़े भ्रष्टाचार के सारे कीर्तिमान
जयपुर। राजस्थान का जलदाय विभाग (PHED) इन दिनों जनसेवा के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के नए-नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए चर्चा में है। विभाग की ‘क्वालिटी कंट्रोल’ विंग, जिसका जिम्मा कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना था, वह खुद भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा गढ़ बन चुकी है। ताज़ा मामला मुख्य अभियंता (CE) आर.के. मीणा के कार्यकाल का है, जिन्होंने 30 अप्रैल 2026 को रिटायरमेंट के आखिरी दिन तक वसूली के खेल को अंजाम दिया।
खुद ही शिकायत, खुद ही जांच: एक शातिर सिंडिकेट:-
सूत्रों के अनुसार, आर.के. मीणा ने क्वालिटी कंट्रोल विंग में रहते हुए वसूली का एक ‘फुल-प्रूफ’ मॉडल तैयार किया था। खेल की स्क्रिप्ट कुछ इस तरह लिखी जाती थी। पहले अपने ही खास लोगों के जरिए ठेका कंपनियों और प्रोजेक्ट्स के खिलाफ फर्जी शिकायतें करवाई जाती थीं। इन शिकायतों की जांच के लिए मीणा खुद ही विशेष कमेटियों का गठन करते थे और फिर ठेकेदारों पर आकर मिलने का दबाव बनाते थे। जो ठेकेदार या इंजीनियर मांग (5 लाख से 50 लाख रुपये तक) पूरी कर देते थे, उनकी जांच रिपोर्ट में ‘गलियां’ निकालकर उन्हें ‘क्लीनचिट’ दे दी जाती थी।
-बदलापुर की कार्रवाई: जो ठेकेदार डिमाण्ड पूरी नहीं करते थे, उनकी फाइलों में गंभीर कमियां निकालकर उनके कार्यों की विस्तृत जांच कराने के साथ फर्म से वसूली करने या फिर फर्म के खिलाफ डीबार/ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई सिफारिश कर दी गई।
रिटायरमेंट के दिन ‘बैकडेट’ का बड़ा खेल:-
हैरानी की बात यह है कि 30 अप्रैल 2026 को अपने रिटायरमेंट के दिन भी आर.के. मीणा ने चैन की सांस नहीं ली। चर्चा है कि उस दिन बैकडेट में दर्जनों जांचों का निपटारा किया गया। 200 से ज्यादा ऐसी जांचें संदेह के घेरे में हैं, जिनमें करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे होने की आशंका है।
दागी चेहरा, फिर भी मलाईदार पद: आर.के. मीणा का विवादों से पुराना नाता :-
-2016 की गिरफ्तारी: मीणा को एसीबी (ACB) ने 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
-फर्जी सर्टिफिकेट मामला: कुख्यात इरकॉन (IRCON) फर्जी सर्टिफिकेट घोटाले और 20 हजार करोड़ के टेंडर विवाद में भी इनका नाम प्रमुखता से आया।
-नियमों की धज्जियां: राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि भ्रष्टाचार के आरोपियों को प्राइम पोस्टिंग नहीं दी जाएगी, इसके बावजूद मीणा को ‘क्वालिटी कंट्रोल’ जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठाए रखा गया।
-बड़ा सवाल: “एसीबी की कार्रवाई से बचने के लिए हाईकोर्ट से स्टे लेने वाला एक अधिकारी आखिर किसके संरक्षण में इतने महत्वपूर्ण पदों पर काबिज रहा?”
मंत्री कन्हैयालाल चौधरी की कार्यशैली पर उठे सवाल:-
पूर्व पीएचईडी मंत्री महेश जोशी के राज में भ्रष्टाचार का जो बीज बोया गया था, वह सरकार बदलने के बाद भी फलता-फूलता रहा। वर्तमान पीएचईडी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी की भूमिका पर भी अब उंगलियां उठने लगी हैं। सवाल यह है कि क्या आर.के. मीणा मंत्री के लिए काम कर रहे थे? या फिर भ्रष्टाचार की इस काली कमाई का हिस्सा ऊपर तक पहुंच रहा था?
अब सवाल उठता है कि सीई आर.के.मीणा के कार्यकाल के दौरान करीब 200 जांच रिपोर्ट पर लिए गए निर्णयों को लेकर जलदाय विभाग की ओर से स्पेशल ऑडिट कराई जाएगी, या फिर इस मामले में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार व वसूली के खेल में भी एसीबी को ही मैदान में उतरना पड़ेगा। Expose Now जल्द ही मुख्य अभियंता, क्वालिटी कंट्रोल की ओर से कराई गई जांच रिपोर्ट के नाम पर हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार में क्लीनचिट देने तथा वसूली के खेल का बड़ा खुलासा करेगा।
