राजस्थान सरकार ने प्रदेश की मेधावी छात्राओं के लिए चलाई जा रही अपनी महत्वाकांक्षी स्कूटी योजनाओं में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव किया है। अब पात्र छात्राओं को स्कूटी के लिए सरकारी टेंडर, खरीद और वितरण की लंबी प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना होगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार ने निर्णय लिया है कि कालीबाई भील और देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना के तहत छात्राओं को भौतिक रूप से स्कूटी देने के बजाय सीधे उनके बैंक खाते में ₹70,000 की राशि ट्रांसफर की जाएगी। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत के अनुसार, इस ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का उद्देश्य भ्रष्टाचार की गुंजाइश को खत्म करना और छात्राओं को अपनी पसंद का वाहन चुनने की आजादी देना है।
इस नई व्यवस्था के तहत सरकार कुल 350 करोड़ रुपये का बजट खर्च करेगी। मंत्री अविनाश गहलोत ने बताया कि सबसे पहले शैक्षणिक सत्र 2024-25 की 26 हजार छात्राओं के खाते में राशि भेजी जाएगी, जिसके तुरंत बाद सत्र 2025-26 की 25 हजार से अधिक छात्राओं को लाभान्वित किया जाएगा। यह राशि वाउचर के माध्यम से सीधे बालिकाओं के बैंक खातों में जमा की जाएगी। इस बदलाव से विभाग को टेंडर प्रक्रिया, वाहनों के भंडारण और वितरण जैसी जटिलताओं से मुक्ति मिलेगी, जिससे योजना का लाभ बिना किसी देरी के और पारदर्शी तरीके से सीधे छात्राओं तक पहुँच सकेगा।
योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए कॉलेज शिक्षा विभाग ने छात्राओं के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। सत्र 2024-25 की वरीयता सूची में चयनित छात्राओं को अपने ऑनलाइन आवेदन पत्र में बैंक संबंधी सूचनाएं अपडेट करनी होंगी। इसमें छात्रा का नाम, बैंक का नाम, खाता संख्या, IFSC कोड और मोबाइल नंबर शामिल हैं। साथ ही, छात्राओं को अपनी बैंक पासबुक या कैंसिल्ड चेक की प्रति भी ऑनलाइन अपलोड करनी होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बैंक खाता अनिवार्य रूप से संबंधित छात्रा का ही होना चाहिए। नोडल अधिकारियों और प्राचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन सूचनाओं की गहनता से जांच करें, ताकि भुगतान प्रक्रिया में कोई त्रुटि न रहे।
