टोंक। राजस्थान के टोंक जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने गुरुवार शाम एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। औषधि नियंत्रण कार्यालय में तैनात एक संविदाकर्मी (कंप्यूटर ऑपरेटर) को मेडिकल स्टोर का लाइसेंस दिलाने के नाम पर 13,000 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई के दौरान कार्यालय में उस वक्त हड़कंप मच गया जब आरोपी ने पकड़े जाने के डर से नोटों को फर्श पर बिखेर दिया।
मेडिकल लाइसेंस के नाम पर मांगी थी घूस
पकड़े गए आरोपी की पहचान सोनू पंवार के रूप में हुई है, जो एक प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत था।
- शिकायत: एक परिवादी ने एसीबी को शिकायत दी थी कि उसका मेडिकल स्टोर का लाइसेंस अटका हुआ है और इसे जारी करवाने के बदले सोनू पंवार 13 हजार रुपए की मांग कर रहा है।
- सत्यापन: एसीबी की टीम ने गोपनीय तरीके से शिकायत का सत्यापन करवाया, जो सही पाई गई।
हाई वोल्टेज ड्रामा: जेब से निकालकर फेंके पैसे
एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) झाबरमल के नेतृत्व में जाल बिछाया गया। जैसे ही परिवादी ने रिश्वत की राशि सोनू को थमाई और उसने पैसे अपनी पैंट की जेब में रखे, वैसे ही एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया।
एसीबी को देखते ही आरोपी के हाथ-पांव फूल गए और उसने खुद को बचाने की नाकाम कोशिश करते हुए जेब से पैसे निकालकर गेट के पास फर्श पर फेंक दिए।
एसीबी की टीम ने मौके से रिश्वत की राशि बरामद कर ली है और आरोपी के हाथों को रंगवाकर साक्ष्य जुटाए हैं।
रडार पर ड्रग इंस्पेक्टर: बड़े गठजोड़ की आशंका
इस गिरफ्तारी के बाद औषधि नियंत्रण विभाग में हड़कंप मच गया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक मामूली संविदाकर्मी अकेले ही लाइसेंस जारी करने का खेल खेल रहा था? एसीबी अब इस मामले में ड्रग इंस्पेक्टर (DI) और अन्य अधिकारियों की भूमिका की गहनता से जांच कर रही है। विभाग को संदेह है कि संविदाकर्मी केवल एक जरिया था और रिश्वत का यह पैसा ऊपर तक पहुंचता था।
