आपका पैसा, आपका हक: राजस्थान के बैंकों में लावारिस पड़े ₹1648 करोड़, वारिसों का इंतजार

जयपुर | राजस्थान के बैंकों में आमजन की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा लावारिस पड़ा है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के बैंकों में मौजूद 64 लाख लावारिस खातों में करीब ₹1,800 करोड़ जमा हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा 4 अक्टूबर, 2025 को शुरू किए गए विशेष अभियान ‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ के बावजूद, पिछले छह माह में केवल ₹151.69 करोड़ (8.42%) राशि ही उनके असली वारिसों तक पहुँच पाई है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) राजस्थान के मुताबिक, बैंकों को अब भी ₹1,648 करोड़ के वारिसों की तलाश है।

96% खाते छोटे, पर 72% रकम बड़े खातों से निकली

अभियान के तहत 31 मार्च तक कुल 64,869 खाते सेटल किए गए। डेटा विश्लेषण से एक रोचक तथ्य सामने आया है कि संख्या में छोटे खाते (1 लाख से कम) अधिक हैं, लेकिन बड़ी राशि बड़े खातों में अटकी है:

  • बड़े खाते (>1 लाख): केवल 2,447 खाते (3.77%) सेटल हुए, लेकिन इनसे ₹109.21 करोड़ लौटे, जो कुल लौटाई राशि का 72% है। इनका औसत सेटलमेंट ₹4.46 लाख रहा।
  • छोटे खाते (<1 लाख): कुल 62,422 खाते (96.23%) सेटल हुए, जिनसे मात्र ₹42.48 करोड़ ही वापस मिल सके। इनका औसत सेटलमेंट ₹6,806 रहा।

जिलावार विश्लेषण: जयपुर टॉप पर, करौली में औसत राशि ज्यादा

प्रदेश में जयपुर जिला लावारिस राशि प्राप्त करने में सबसे आगे रहा, जहाँ 10,944 खातों के ₹31.52 करोड़ लौटाए गए। यह प्रदेश की कुल लौटाई राशि का 20.78% हिस्सा है।

औसत सेटलमेंट में टॉप 5 जिले (प्रति खाता सबसे ज्यादा रकम)

जिलासेटल खातेकुल राशि (करोड़ में)प्रति खाता औसत (₹)
करौली747₹3.9452,822
उदयपुर2,129₹10.7350,403
चित्तौड़गढ़941₹4.6349,261
प्रतापगढ़404₹1.7743,955
जैसलमेर355₹1.4841,769

अधिक खाते सेटल होने वाले जिले (परंतु कम औसत रकम)

जिलासेटल खातेकुल राशिप्रति खाता औसत (₹)
डीग955₹52.11 लाख5,457
श्रीगंगानगर4,392₹3.52 करोड़8,035
हनुमानगढ़2,259₹2.38 करोड़10,566
अलवर2,870₹3.61 करोड़12,604
भरतपुर1,687₹2.25 करोड़13,386

क्यों लावारिस हो जाती है गाढ़ी कमाई?

अनक्लेम्ड डिपॉजिट (Unclaimed Deposits) बढ़ने के मुख्य रूप से तीन कारण सामने आए हैं:

  1. खाताधारक की मृत्यु: परिवार को बैंक खातों की जानकारी न होना।
  2. नॉमिनेशन की कमी: खातों में नॉमिनी (उत्तराधिकारी) का नाम अपडेट न होना।
  3. पलायन: काम या अन्य कारणों से दूसरे शहरों में चले जाना और पुराने खातों को भूल जाना।

अपना पैसा कैसे खोजें? : UDGAM पोर्टल है समाधान

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आमजन की सुविधा के लिए UDGAM पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से कोई भी व्यक्ति घर बैठे यह चेक कर सकता है कि उसके या उसके परिजनों के नाम पर किसी भी सरकारी या निजी बैंक में कोई लावारिस राशि तो नहीं पड़ी है। बैंकर्स समिति ने अपील की है कि लोग जागरूक बनें और अपनी रुकी हुई पूंजी पर दावा पेश करें।

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