राजस्थान सरकार द्वारा आठ नव-गठित जिलों में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद पर ग्रामीण विकास सेवा (RDS) के अधिकारियों की नियुक्ति के आदेश ने एक नया प्रशासनिक विवाद पैदा कर दिया है। आरएएस (RAS) एसोसिएशन ने इस निर्णय को नियमों के विरुद्ध बताते हुए ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा को पत्र लिखकर आदेश संख्या 1953 को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
परंपरा और नियमों की अनदेखी का आरोप
आरएएस एसोसिएशन का दावा है कि राज्य गठन के समय से ही जिला कलेक्टर के बाद सीईओ का पद सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक और न्यायिक शक्तियों वाला पद रहा है, जो परंपरागत रूप से आईएएस या आरएएस अधिकारियों के लिए सृजित किया जाता रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 33 जिलों में से 25 पदों पर आईएएस और 8 पदों पर आरएएस अधिकारी कार्यरत हैं।
इन 8 जिलों में हुआ है बदलाव
ग्रामीण विकास विभाग ने हाल ही में 8 नई जिला परिषदों में कुल 88 पदों के सृजन का आदेश जारी किया था, जिनमें इन जिलों के नाम शामिल हैं:
- डीग
- बालोतरा
- खैरथल-तिजारा
- सलूम्बर
- फलौदी
- कोटपूतली-बेहरोड़
- ब्यावर
- डीडवाना-कुचामन
एसोसिएशन की मुख्य आपत्तियां
- कार्मिक विभाग की अनदेखी: एसोसिएशन का कहना है कि इन पदों को ग्रामीण विकास राज्य सेवा के तहत सृजित करते समय न तो कार्मिक विभाग की सहमति ली गई और न ही आवश्यक प्रक्रिया अपनाई गई।
- पदोन्नति पर असर: नए जिलों में सीईओ पद आरडीएस को देने से आरएएस अधिकारियों के पदोन्नति के अवसर सीमित हो जाएंगे और कैडर संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
- असंतोष में वृद्धि: पिछले कुछ वर्षों में आरएएस के पदों पर अन्य विभागीय अधिकारियों की नियुक्ति से अधिकारियों के बीच असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी इस आदेश में सीईओ के अलावा अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, परियोजना अधिकारी (लेखा), सहायक लेखाधिकारी, और कनिष्ठ सहायक के 24 पदों सहित कई अन्य पदों को भी मंजूरी दी गई थी। फिलहाल, आरएएस एसोसिएशन ने इस पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर पहले की तरह प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति बहाल करने की मांग की है।
