श्रीडूंगरगढ़ में शिक्षा निदेशक का बड़ा एक्शन: 11 साल बाद स्कूल जाने के आदेश टाले तो लेक्चरर सस्पेंड, गैर-हाजिर टीचर को भी नोटिस

राजस्थान के शिक्षा विभाग में पदस्थापित होने के बावजूद एक व्याख्याता पिछले 11 वर्षों से शैक्षणिक कार्य के बजाय एसडीएम और तहसीलदार कार्यालय में सेवाएं दे रहे थे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए व्याख्याता को सस्पेंड कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, डूंगरपुर तय किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

व्याख्याता (भूगोल) मुकेश कुमार झाझवाल, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चोटीसर (ब्लॉक श्रीडूंगरगढ़) में पदस्थापित थे। वे साल 2015 से श्रीडूंगरगढ़ के एसडीएम और तहसीलदार कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर तैनात थे।

शिक्षा विभाग ने 24 जुलाई 2023 को एक स्पष्ट आदेश जारी कर सभी शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त कर उन्हें अपने मूल विद्यालयों में लौटने के निर्देश दिए थे। लेकिन, मुकेश कुमार झाझवाल ने इन आदेशों की अवहेलना की और स्कूल जॉइन करने के बजाय लगातार प्रशासनिक दफ्तर में ही काम करते रहे। इसी अनुशासनहीनता को देखते हुए निदेशालय ने उन्हें निलंबित कर दिया है।


निरीक्षण के दौरान एक और शिक्षक पर गिरी गाज

निदेशक सीताराम जाट ने सोमवार को श्रीडूंगरगढ़ के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO) के साथ क्षेत्र के सरकारी स्कूलों का औचक निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, धीरदेसर चोटियान का जायजा लिया।

  • गैर-हाजिर मिले शिक्षक: निरीक्षण के दौरान अध्यापक मोहम्मद रफीक बिना किसी पूर्व सूचना या जानकारी के स्कूल से गायब पाए गए।
  • कार्रवाई: ड्यूटी के दौरान बिना अनुमति अनुपस्थित रहने पर निदेशालय ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

समीक्षा बैठक के मुख्य बिंदु

निरीक्षण के दौरान निदेशक ने प्रवेश उत्सव की प्रगति, नामांकन में वृद्धि और ‘आउट ऑफ स्कूल’ बच्चों को दोबारा मुख्यधारा से जोड़ने के संबंध में शैक्षणिक व्यवस्था की समीक्षा भी की।


संपादकीय टिप्पणी: “यह कार्रवाई प्रदेश के उन शिक्षकों के लिए बड़ा सबक है जो रसूख के दम पर सालों तक डेपुटेशन पर रहकर स्कूलों से दूर रहते हैं। बच्चों की पढ़ाई के साथ समझौता विभाग अब बर्दाश्त नहीं करेगा।”

Share This Article
Leave a Comment