-‘सरकारी बागवान’, न गड्ढे खुदे न पौधे लगे, बस फाइलों में लहलहा उठी हरियाली!
जयपुर/जैसलमेर। राजस्थान में हरियाली बढ़ाने के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के 100 करोड़ रुपये मिट्टी में मिला दिए गए। ‘एक्सपोज नाउ’ के हाथ लगी जानकारी के मुताबिक, राज्य के वन विभाग ने एक ऐसा कारनामा किया है जिसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। विभाग ने कागजों पर तो लाखों पौधे रोप दिए, लेकिन जमीन पर न गड्ढे खुदे और न ही एक पत्ता नजर आया।
जमीन पर सन्नाटा, फाइलों में हरियाली:-
Expose Now की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के विभिन्न जिलों में पौधारोपण के नाम पर जनता के टैक्स का पैसा पानी की तरह बहाया गया, लेकिन मौके पर कुछ नहीं मिला। राज्य की 246 साइट्स की जांच हुई, जिसमें से 48 डिवीजन पूरी तरह ‘फेल’ पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, कई जगहों पर तो पौधे लगाने के लिए गड्ढे तक नहीं खोदे गए, लेकिन भुगतान पूरा उठा लिया गया। एक अकेले RFBP-2 प्रोजेक्ट का गणित देखें तो 50 हेक्टेयर की एक साइट पर करीब 42 लाख का बजट होता है। इस हिसाब से 246 साइट्स पर 102 करोड़ रुपये से अधिक का चूना सरकारी खजाने को लगाया गया है।
भ्रष्टाचार की ‘जड़ें’ बहुत गहरी:-
आधिकारिक मॉनिटरिंग में हुए खुलासे ने विभाग की पोल खोल दी है। राज्य की 246 साइट्स पर पौधारोपण का लक्ष्य था, लेकिन हकीकत में अधिकतर जगह सिर्फ ‘लीपापोती’ की गई। कई साइट्स पर तो पौधारोपण का कुल एरिया ही कागजों में कम कर दिया गया ताकि बजट को ठिकाने लगाया जा सके। अकेले RFBP-2 और RFBP-1 जैसी योजनाओं का हिसाब लगाया जाए, तो यह गबन 102 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंचता है।
डिवीजनवार फेल्योर, कहां हुआ सबसे बड़ा खेल:-
जांच में सामने आया है कि राजस्थान के कई डिवीजन पूरी तरह ‘फेल’ साबित हुए हैं। यहाँ न काम हुआ, न पौधे लगे, बस बजट की बंदरबांट हुई।
डिवीजन / कार्यालय फेल साइट्स की संख्या
श्रीगंगानगर, चूरू, हनुमानगढ़ 39 (सबसे ज्यादा)
बारां, कोटा, झालावाड़ 18
धौलपुर, सवाई माधोपुर 11
अलवर 10
करोड़ों के घोटाले पर अधिकारियों का मौन:-
जब भ्रष्टाचार का यह जिन्न बोतल से बाहर आया, तो जिम्मेदार अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। इस घोटाले पर वन विभाग के ऊपर से नीचे के अधिकारी पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं। यह चुप्पी अपने आप में बड़े सवाल खड़े करती है। क्या आला अधिकारियों की शह पर ही यह 100 करोड़ का ‘पौधा’ घोटाला फला-फूला है?
कैसे होता है बजट का खेल?
-नियमों के मुताबिक, एक पौधे की देखरेख के लिए 5 साल तक बजट मिलता है:
-पहला साल: गड्ढे खोदना और पौधे तैयार करना।
-दूसरा साल: पौधारोपण।
-तीसरा साल: रखरखाव और 10% पौधों का रिप्लेसमेंट।
-चौथा और पांचवा साल: चौकीदारी और देखरेख।
Expose Now का सवाल:
जब जमीन पर गड्ढे ही नहीं खुदे, तो 5 साल का रखरखाव का पैसा किसकी जेब में जा रहा है? निगरानी और मूल्यांकन मॉड्यूल की जांच ने यह तो साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार चरम पर है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इन ‘कागजी बागवानों’ पर कोई सख्त कार्रवाई करती है या 100 करोड़ की यह फाइल भी दफ्तरों की धूल फांकती रह जाएगी।
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