राजस्थान शिक्षा परिषद का ‘अजब-गजब’ प्रबंधन: 16 अप्रैल से शुरू होना था कार्यक्रम, आदेश निकले 10 दिन बाद

जयपुर। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के अधिकारियों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को समय प्रबंधन और अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले जिम्मेदार अधिकारी खुद ‘टाइम मैनेजमेंट’ में पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं। ताजा मामला ‘जल पखवाड़ा’ (Jal Pakhwada) के आयोजन से जुड़ा है, जहाँ कार्यक्रम आधा बीत जाने के बाद अधिकारियों की नींद टूटी है।

क्या है पूरा मामला?

भारत सरकार के ‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन’ के तहत प्रदेश के सभी राजकीय विद्यालयों में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक ‘जल पखवाड़ा’ मनाया जाना निर्धारित था। इस दौरान स्कूलों में जल संरक्षण की शपथ, निबंध प्रतियोगिता, पेंटिंग और जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जानी थीं। नियमानुसार इसके आदेश 16 अप्रैल से पहले जारी हो जाने चाहिए थे, लेकिन राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के अधिकारियों ने घोर लापरवाही बरतते हुए इसका आदेश 25 अप्रैल को जारी किया।

अब सवाल यह उठता है कि जब पखवाड़ा खत्म होने में महज 5 दिन शेष बचे हैं, तो स्कूल स्तर पर पखवाड़े की गतिविधियाँ कैसे संपन्न होंगी? क्या यह केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगा?

शिक्षा मंत्री की नाराजगी भी बेअसर

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पदभार ग्रहण करने के बाद से ही शिक्षा विभाग और परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर कई बार सार्वजनिक रूप से नाराजगी जता चुके हैं। हाल ही में उन्होंने औचक निरीक्षणों के दौरान अधिकारियों और शिक्षकों को समयबद्धता और गुणवत्तापूर्ण कार्य के लिए चेतावनी भी दी थी। इसके बावजूद परिषद के आला अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंग रही है। बिना किसी ठोस योजना के ‘जब मन में आए तब आदेश निकाल देना’ अब परिषद की कार्यशैली बन चुकी है।

असमंजस में जिला शिक्षा अधिकारी और शिक्षक

25 अप्रैल को अचानक आए इस आदेश ने प्रदेश के सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों (CDAOs) और संस्था प्रधानों को हैरत में डाल दिया है। शिक्षकों का कहना है कि 16 से 25 अप्रैल तक की गतिविधियों की रिपोर्ट और फोटो अब कैसे पोर्टल पर अपलोड की जाएगी? क्या अधिकारियों की इस लेटलतीफी का खामियाजा अब जमीनी स्तर पर काम करने वाले शिक्षकों को भुगतना पड़ेगा?

उठ रहे हैं गंभीर सवाल:

  • क्या शिक्षा परिषद के अधिकारी प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को यही ‘समय प्रबंधन’ सिखाना चाहते हैं?
  • क्या जानबूझकर केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण अभियानों की हवा निकाली जा रही है?
  • क्या लापरवाह अधिकारियों पर मुख्यमंत्री या शिक्षा मंत्री की ओर से कोई कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी?

फिलहाल, परिषद के इस ‘अजब-गजब’ फरमान की चर्चा पूरे प्रदेश के शिक्षा जगत में हो रही है और लोग इसे व्यवस्था की नाकामी मान रहे हैं।

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