-PG सरकारी खर्चे पर, प्रैक्टिस प्राइवेट क्लिनिक में: अब बांड तोड़ने वालों से होगी पाई-पाई की वसूली !
जयपुर। राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में चल रहे एक बहुत बड़े खेल का भंडाफोड़ हुआ है। सालों से सिस्टम की आंखों में धूल झोंककर कुर्सियां घेरे बैठे फरार डॉक्टरों के खिलाफ विभाग ने अब सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। ये वे डॉक्टर हैं जो सरकारी रिकॉर्ड में तो तैनात हैं, लेकिन हकीकत में सालों से नदारद हैं। प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में जड़ जमा चुके ‘भ्रष्टाचार के दीमकों’ पर अब सरकार का हंटर चला है। 697 ऐसे डॉक्टरों को बर्खास्त करने की तैयारी है, जो सरकारी कुर्सी पर कब्जा जमाकर या तो विदेशों में डॉलर छाप रहे हैं या आलीशान निजी क्लीनिक चला रहे हैं।
सिस्टम की विफलता: फाइलों में ‘हाउसफुल’, अस्पतालों में ‘सन्नाटा’:-
यह केवल ड्यूटी से गायब होने का मामला नहीं, बल्कि राजस्थान के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ हुआ एक बड़ा धोखा है। ये ‘लापता’ डॉक्टर स्त्री रोग, बाल रोग, रेडियोलॉजी और सर्जरी जैसे महत्वपूर्ण विभागों के विशेषज्ञ हैं।
-भर्ती का रास्ता बंद: कागजों पर इन डॉक्टरों की उपस्थिति की वजह से पद ‘भरे हुए’ दिखाई देते हैं, जिससे नए और कर्मठ डॉक्टरों की भर्ती नहीं हो पा रही है।
-मरीजों के साथ खिलवाड़: अस्पतालों की फाइलों में स्टाफ पूरा दिखता है, लेकिन इलाज के लिए मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
लापरवाही का रिकॉर्ड: 2004 से गायब, फिर भी ‘सरकारी डॉक्टर’:-
विभाग के रिकॉर्ड जो कहानी बयां कर रहे हैं, वह चौंकाने वाली है। कुछ डॉक्टर तो दो दशकों से अधिक समय से ड्यूटी पर नहीं आए हैं। उदयपुर में एक बाल रोग विशेषज्ञ जुलाई 2004 से यानी पिछले 22 सालों से गायब हैं। वहीं एक सीनियर स्त्री रोग विशेषज्ञ 2013 से नदारद हैं। अजमेर के जेएलएन अस्पताल के एक सर्जरी विशेषज्ञ 2007 में तबादला होने के बाद से आज तक अस्पताल नहीं पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. रवि प्रकाश के मुताबिक, ये डॉक्टर या तो विदेश में सैटल हो चुके हैं या फिर अपना निजी क्लिनिक और अस्पताल चलाकर मोटी चांदी काट रहे हैं।
5 दिन का अल्टीमेटम और ‘बांड’ की वसूली:-
प्रशासनिक नींद टूटने के बाद अब सरकार सख्त मोड में है:
-बर्खास्तगी की तैयारी: सभी जिलों के CMHO को 5 दिन के भीतर इन डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई (CCA नियमों के तहत) का प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
-वसूली का हंटर: जिन डॉक्टरों ने सरकारी कोटे से PG की पढ़ाई की और बिना अनिवार्य ‘सेवा बांड’ पूरा किए गायब हो गए, अब उनसे पाई-पाई की वसूली की जाएगी।
-सेवा समाप्ति: एक साल से अधिक समय से नदारद डॉक्टरों की सेवाएं तुरंत समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अकाउंटेबिलिटी का सबसे बड़ा सवाल:-
सवाल यह उठता है कि आखिर 22 साल तक इन ‘घोस्ट डॉक्टर्स’ का नाम फाइलों में कैसे चलता रहा? क्या विभाग के ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों ने जानबूझकर अपनी आंखें मूंद रखी थीं? जनता के हक की नौकरी दबाकर बैठे इन डॉक्टरों के साथ-साथ उन अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए जिन्होंने इस भ्रष्टाचार को पनपने दिया।
“सिस्टम की दीमक बनकर जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले इन ‘सफेदपोश’ चेहरों का अब बेनकाब होना तय है। सरकारी कुर्सी को अपनी जागीर समझने वालों का गेम अब ओवर हो चुका है। विभाग की यह कार्रवाई कागजी खानापूर्ति है या वास्तविक बदलाव की शुरुआत, ‘एक्सपोज नाउ’ की नजर हर अपडेट पर बनी रहेगी। हम रुकेंगे नहीं, क्योंकि सच दिखाना हमारा जुनून है!” टीम Expose Now
