-वित्त विभाग को अंधेरे में रख ठेकेदार पर लुटाए 2.89 करोड़
-PHED उदयपुर संभाग में मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल का ‘मनीपावर’, इंजीनियर नतमस्तक, सिस्टम फेल !
जयपुर/उदयपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘EXPOSE NOW’ की मुहिम जारी है। आज ‘खुलासा पार्ट-4’ में हम पर्दाफाश कर रहे हैं उस वित्तीय अनियमितता का, जहां सरकारी नियमों को ताक पर रखकर मूल्य वृद्धि के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये एक निजी फर्म को थमा दिए गए। राजस्थान के जलदाय विभाग (PHED) में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका जीवंत उदाहरण ‘मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल’ और विभागीय अधिकारियों का अपवित्र गठबंधन है। ‘EXPOSE NOW’ के हाथ लगे दस्तावेज और ऑडिट रिपोर्ट इस बात की तस्दीक करते हैं कि कैसे एक रसूखदार फर्म ने पूरे तंत्र को अपने हाथों की कठपुतली बना रखा है, जिसमें जलदाय विभाग के इंजीनियर ही नहीं बल्कि अधिकारी और PHED मंत्री कार्यालय भी शामिल है।
वित्त विभाग नियमों की सरेआम उड़ाई धज्जियां:-
जल जीवन मिशन (JJM) के तहत डूंगरपुर जिले के 151 गांवों में रेट्रोफिटिंग कार्य के लिए मेसर्स जियो मिलर एवं जगदीश प्रसाद अग्रवाल (जे.वी.) को ठेका दिया गया था । ऑडिट के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि परियोजना खंड-द्वितीय, उदयपुर ने वित्त विभाग की अनिवार्य अनुमति के बिना ही संवेदक को करीब 2.89 करोड़ रुपये का मूल्य वृद्धि (Price Escalation) भुगतान कर दिया ।

वित्त विभाग की स्पष्ट मनाही के बावजूद मेहरबानी:-
दस्तावेजों के अनुसार, वित्त विभाग (व्यय-3) ने 6 जुलाई 2022 को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि भारत सरकार के परिचालन दिशा-निर्देशों के अनुसार जल जीवन मिशन की योजनाओं में कोई समय वृद्धि या मूल्य वृद्धि देय नहीं होगी । यदि ऐसी कोई वृद्धि की जाती है, तो उससे पूर्व वित्त विभाग की अनुमति लेना अनिवार्य है । लेकिन उदयपुर खंड कार्यालय ने इन आदेशों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया ।
भुगतान का पूरा ब्यौरा (2.89 करोड़ का खेल):-
दिनांक- 28.11.2022 को मूल्य वृद्धि के नाम पर ठेका फर्म को 1,07,30,745 रुपये का भुगतान किया गया ।
दिनांक- 31.03.2023 को मूल्य वृद्धि के नाम पर ठेका फर्म को 83,71,160 रुपये की राशि जारी की गई ।
दिनांक- 20.05.2024 को मूल्य वृद्धि के नाम पर ठेका फर्म को दो अलग-अलग बिलों के माध्यम से क्रमशः 22,42,603 रुपये और 75,53,365 रुपये का भुगतान हुआ ।
भ्रष्टाचार की ‘प्रोटेक्शन शील्ड’, इंजीनियरों पर फर्म का खौफ:-
मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल (J.V.) ने उदयपुर संभाग के कनिष्ठ अभियंता (JEN) से लेकर मुख्य अभियंता (CE) तक, पूरे इंजीनियरिंग कैडर को अपने प्रभाव में ले रखा है। विभाग के गलियारों में चर्चा है कि जयपुर मंत्रालय से फर्म को सीधा संरक्षण प्राप्त है, जिससे कोई भी अधिकारी कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। जो भी ईमानदार अधिकारी फर्म की अनियमितताओं पर सवाल उठाता है, उसे तुरंत तबादले या फर्जी विभागीय जांच का सामना करना पड़ता है।
98 करोड़ का प्रोजेक्ट, 125 करोड़ का खेल:-
फर्म के रसूख का सबसे बड़ा सबूत यह है कि जिस कार्य का मूल कार्यादेश 98.29 करोड़ का था, उसे कथित फर्जीवाड़ों के जरिए खींचकर 125 करोड़ तक पहुँचा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इस भारी-भरकम बजट वृद्धि पर विभाग के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने आपत्ति दर्ज नहीं की।
व्यवस्था की खामोशी या मिलीभगत?
ऑडिट रिपोर्ट के पन्नों ने जिस ‘जगदीश प्रसाद अग्रवाल’ और पीएचईडी (PHED) के गठजोड़ का काला चिट्ठा खोला है, वह केवल 2.89 करोड़ की अनियमितता तक सीमित नहीं है । यह कहानी है उस सिस्टम की, जहाँ रसूखदार फर्म के आगे कानून बौना साबित हो रहा है और ईमानदार अधिकारी तबादलों के डर से चुप रहने को मजबूर हैं। 98 करोड़ के प्रोजेक्ट को 125 करोड़ तक पहुँचा देना और उसके बाद भी विभाग का कोई एक्शन न लेना, यह साबित करता है कि मेहरबानी की जड़ें बहुत गहरी हैं। जलदाय विभाग की इस चुप्पी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार केवल नीचे नहीं, बल्कि ऊपर तक अपनी पैठ बना चुका है। लेकिन याद रहे, सच को दबाया जा सकता है, मिटाया नहीं।
EXPOSE NOW खुलासा (Part-5) में देखिए:
‘EXPOSE NOW’ की टीम अपनी अगली जांच में उस बड़े फर्जीवाड़े को सामने लाएगी, जिसे सुनकर सिस्टम हिल जाएगा। क्या है पाइपलाइनों की लंबाई का गणित? कैसे कागजों पर पाइप बिछाकर फर्म ने उठाया करोड़ों का फर्जी भुगतान? दस्तावेजों के साथ देखिए ‘EXPOSE NOW खुलासा पार्ट- 5’।
जुड़े रहिए ‘EXPOSE NOW’ के साथ—क्योंकि सच का खुलासा अभी बाकी है
