जयपुर: ट्री हाउस स्कूल मामले में RTE छात्रों को राहत, लेकिन सामान्य वर्ग के बच्चों का भविष्य अभी भी अधर में!

जयपुर के ट्री हाउस स्कूल के अचानक बंद होने से उत्पन्न हुआ संकट अब एक नए मोड़ पर है। जिला प्रशासन की मध्यस्थता के बाद शिक्षा के अधिकार (RTE) के अंतर्गत आने वाले बच्चों को तो राहत मिल गई है, लेकिन स्कूल में पढ़ने वाले अन्य बच्चों के भविष्य पर अभी भी काले बादल मंडरा रहे हैं।

RTE छात्रों के लिए खुशखबरी

जिला कलेक्टर संदेश नायक की विशेष पहल पर ट्री हाउस स्कूल के 35 RTE छात्रों को नजदीकी पोद्दार स्कूल में प्रवेश दिलाने का निर्णय लिया गया है। इन बच्चों को कक्षा 8वीं तक निःशुल्क शिक्षा मिलती रहेगी। स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच हुई बैठक में इस समाधान पर सहमति बनी, जिससे उन परिवारों की चिंता दूर हुई जो अपने बच्चों के स्थानांतरण (Transfer) के लिए भटक रहे थे।

लेकिन बाकी बच्चों का क्या? – एक बड़ा सवाल

जहाँ एक ओर RTE श्रेणी के बच्चों को राहत मिली है, वहीं एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या शिक्षा का अधिकार केवल एक विशेष श्रेणी तक ही सीमित है? ट्री हाउस स्कूल में ऐसे कई अन्य छात्र भी थे जो RTE के अंतर्गत नहीं आते।

  • अभिभावकों की दोहरी मार: यद्यपि प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद स्कूल प्रबंधन ने फीस लौटाने की बात कही है, लेकिन सत्र के बीच में अचानक स्कूल बंद होने से इन बच्चों के सामने ‘महंगी फीस’ और ‘नए स्कूल में सीट’ की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
  • समानता का अधिकार: अभिभावकों का तर्क है कि यदि प्रशासन एक वर्ग के बच्चों के लिए स्कूल सुनिश्चित कर सकता है, तो बाकी बच्चों को उनके हाल पर क्यों छोड़ दिया गया? क्या उन बच्चों का पढ़ना जरूरी नहीं है?

प्रशासन की जिम्मेदारी

जमीन विवाद के कारण स्कूल का अचानक बंद होना पूरी तरह से प्रबंधन की विफलता है। प्रशासन ने RTE बच्चों को तो सुरक्षा कवच प्रदान कर दिया, लेकिन अब उम्मीद की जा रही है कि सामान्य वर्ग के उन बच्चों के लिए भी कोई उचित निर्णय लिया जाएगा जो अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। क्या प्रशासन इन बच्चों के लिए भी किसी निजी स्कूल के साथ समन्वय बैठाएगा या इन्हें महंगी फीस के बोझ तले दबने के लिए छोड़ दिया जाएगा?

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