जयपुर
राजस्थान के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के ठेकेदारों ने अपनी लंबित मांगों और बकाया भुगतान को लेकर सरकार के खिलाफ निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। आल राजस्थान PHED कांट्रेक्टर एसोसिएशन की संघर्ष समिति के बैनर तले पिछले कई दिनों से चल रहा धरना अब उग्र रूप लेने जा रहा है।
क्यों हो रहा है विरोध?
संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश बिश्नोई के अनुसार, ठेकेदार पिछले 13 अप्रैल 2026 से जल भवन मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि विभाग ने अब तक उनसे किसी भी प्रकार की सकारात्मक वार्ता नहीं की है, जिसके कारण प्रदेशभर के पंजीकृत ठेकेदारों में भारी रोष है।
पेयजल ठप करने का शेड्यूल
संघर्ष समिति ने पेयजल योजनाओं के संचालन एवं संधारण (O&M) कार्य को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का निर्णय लिया है:
- 22 अप्रैल 2026: शाम 4 बजे से 6 बजे तक कार्य बंद रहेगा।
- 23 अप्रैल 2026: शाम 4 बजे से 7 बजे तक कार्य बंद रहेगा।
- 24 अप्रैल 2026: शाम 4 बजे से 8 बजे तक कार्य बंद रहेगा।
- 25 अप्रैल 2026: प्रदेशभर में जल योजनाओं का संपूर्ण कार्य बंद कर दिया जाएगा।
इस हड़ताल की पूरी जिम्मेदारी संघर्ष समिति ने राजस्थान सरकार और पीएचईडी विभाग पर डाली है।
ठेकेदारों की प्रमुख 8 सूत्री मांगें
- लंबित भुगतान: JJM, MNP, और मेजर प्रोजेक्ट्स सहित सभी सत्यापित बिलों का एकमुश्त भुगतान किया जाए।
- जीएसटी और प्राइस वेरिएशन: जीएसटी अंतरण राशि और निविदा शर्तों के अनुसार मूल्य भिन्नता (Price Variation) का भुगतान हो।
- पूर्णता प्रमाण पत्र: 3-4 साल पहले पूरे हो चुके कार्यों के अंतिम बिल बनाकर कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किए जाएं।
- दोषमुक्त विस्तार: विभाग की देरी के कारण विलंबित कार्यों में ठेकेदारों को दोषी न मानकर समयावधि बढ़ाई जाए और कोविड काल जैसी राहत दी जाए।
- अमृत 2.0: इस योजना के तहत किए गए कार्यों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित हो।
- पारदर्शी प्रणाली: भविष्य के लिए एक पारदर्शी भुगतान प्रणाली लागू की जाए।
- नई BSR दरें: निविदा शर्तों में बार-बार संशोधन रुके और वर्तमान बाजार दरों के आधार पर नई BSR (जिसमें जीएसटी अलग हो) जारी की जाए।
- स्थानांतरण संबंधी बाधाएं: अधिकारियों के तबादले के कारण रुके हुए बिलों का तत्काल निपटारा हो और DLP अवधि के बाद के O&M का भुगतान BSR के अनुसार हो।
बड़ी कंपनियों को निर्देश
संघर्ष समिति ने एलएंडटी (L&T), एनसीसी (NCC), एसपीएमएल (SPML) और इंडियन ह्यूम पाइप जैसी 45 से अधिक बड़ी फर्मों को भी पत्र भेजकर इस कार्य बहिष्कार में शामिल होने और विभाग को इस संबंध में मेल करने का निर्देश दिया है।
