जयपुर। सोशल मीडिया के इस दौर में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते ऑनलाइन उत्पीड़न, ब्लैकमेलिंग और अभद्रता पर लगाम लगाने के लिए राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने एक बड़ा और बेहद संवेदनशील कदम उठाया है। अब इंटरनेट या सोशल मीडिया पर परेशान की जा रही पीड़ित महिलाएं और बालिकाएं बिना अपनी पहचान उजागर किए (Anonymously) पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकती हैं।
इसके लिए नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर एक विशेष ‘अनाम रिपोर्टिंग’ (Anonymous Reporting) सुविधा को एक्टिव किया गया है, ताकि लोक-लाज या सुरक्षा के डर से जो पीड़ित सामने नहीं आ पाते थे, वे भी अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचा सकें।
नहीं मांगी जाएगी कोई निजी जानकारी
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) श्री वीके सिंह ने बताया कि यदि किसी महिला या बालिका को फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अश्लील मैसेज, कमेंट या धमकी देकर परेशान किया जा रहा है, तो उन्हें घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर ‘Women/Child Related Crime’ के तहत ‘Report Anonymously’ का विकल्प दिया गया है। इस विकल्प को चुनने पर पोर्टल शिकायतकर्ता से उनका नाम, पता या अन्य कोई भी संवेदनशील सरकारी पहचान पत्र (जैसे आधार नंबर आदि) नहीं मांगता है।
शिकायत दर्ज करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया:
- सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल
cybercrime.gov.inपर जाएं। - होमपेज पर मौजूद “Register a Complaint” विकल्प पर क्लिक करें।
- इसके बाद “Women/Child Related Crime” सेक्शन को चुनें।
- अब आपके सामने दो विकल्प आएंगे, जिनमें से आपको “Register Anonymously” का चयन करना है।
- स्क्रीन पर आने वाले डिस्क्लेमर (नियम व शर्तें) को स्वीकार करने के बाद घटना का पूरा विवरण भरें। इसमें अपराध की श्रेणी, तारीख, समय और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का नाम दर्ज करना होगा।
- यदि आरोपी की प्रोफाइल लिंक या आईडी उपलब्ध है, तो उसे दर्ज करें और आपत्तिजनक सामग्री का स्क्रीनशॉट अपलोड कर सबमिट कर दें।
- सबमिट होते ही आपको एक कंप्लेंट आईडी (Complaint ID) मिलेगी, जिससे आप भविष्य में अपनी शिकायत का स्टेटस ट्रैक कर सकती हैं।
स्क्रीनशॉट और प्रोफाइल लिंक हैं सबसे बड़े सबूत
साइबर क्राइम शाखा ने आमजन और खासकर युवाओं से अपील की है कि जब भी ऐसी कोई घटना हो, तो गुस्से में आकर चैट या मैसेज को तुरंत डिलीट न करें। आरोपी की प्रोफाइल का यूआरएल (URL Link) और चैट के स्क्रीनशॉट को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि कानूनी कार्रवाई के दौरान कोर्ट और पुलिस के लिए यही सबसे पुख्ता डिजिटल साक्ष्य (Digital Evidence) होते हैं।
आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर्स: यदि आपके साथ किसी भी प्रकार की साइबर ठगी या ऑनलाइन अपराध का प्रयास होता है, तो तुरंत इन माध्यमों पर सूचना दें:
- राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर: 1930
- साइबर हेल्पडेस्क नंबर्स: 9256001930 / 9257510100
- वेबसाइट:
cybercrime.gov.in या अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।
