उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की मौत मामले में कुलदीप सेंगर को राहत, दिल्ली HC ने खारिज की सजा बढ़ाने की याचिका

नई दिल्ली। उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में एक बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा बढ़ाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि अपील दायर करने में हुई भारी देरी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

1945 दिनों की देरी बनी रुकावट

इस मामले में सजा बढ़ाने के लिए जो अपील दाखिल की गई थी, उसमें कुल 1945 दिनों का विलंब हुआ था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि इतनी लंबी देरी के बाद अपील लाना तर्कसंगत नहीं है, खासकर तब जब इस देरी के पीछे कोई ठोस और विश्वसनीय वजह पेश नहीं की गई हो। इसी तकनीकी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला उत्तर प्रदेश के उन्नाव से जुड़ा है, जहाँ साल 2018 में पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, ट्रायल कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर और अन्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी।

सजा बढ़ाने की दलीलें हुईं विफल

याचिकाकर्ता ने अदालत में पुरजोर दलील दी थी कि यह अपराध बेहद गंभीर प्रकृति का है और दी गई 10 साल की सजा जुर्म के अनुपात में काफी कम है। याचिका में तर्क दिया गया था कि:

  • यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति से जुड़ा नहीं, बल्कि पूरी न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल है।
  • भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अदालत को एक कड़ा संदेश देना जरूरी है।

हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और समय सीमा के उल्लंघन (देरी) को प्राथमिकता देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

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