SOG की बड़ी कार्रवाई: पेपर लीक का मास्टरमाइंड भीम सिंह गिरफ्तार, टैबलेट पर रटवाता था पेपर

स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) संयुक्त भर्ती परीक्षा-2020 (पुनः परीक्षा 2021) के पेपर लीक मामले में मुख्य आरोपी भीम सिंह (46, निवासी अलवर) को गिरफ्तार किया है। आरोपी इतना शातिर था कि पुलिस ट्रैकिंग से बचने के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल ही नहीं करता था। इसके बजाय वह ‘डिजिटल पाठशाला’ चलाकर टैबलेट और आईपैड पर अभ्यर्थियों को पेपर रटवाता था।

भूपेंद्र सारण का करीबी और गिरोह का संचालक

भीम सिंह कुख्यात भूपेंद्र सारण का करीबी साथी है और अलवर-भरतपुर क्षेत्र में अपना गिरोह संचालित करता था। एसओजी एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, आरोपी भीम सिंह प्रत्येक अभ्यर्थी से 25 से 30 लाख रुपए वसूलता था। गिरफ्तारी के डर से उसने अपराध में इस्तेमाल किया गया टैबलेट अपनी बेटी के ससुराल में छिपा दिया था, जिसे एसओजी ने बरामद कर लिया है।

कोचिंग और कंप्यूटर लैब बने लीक सेंटर

आरोपी भीम सिंह और सरगना भूपेंद्र सारण पहले रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) में साथ काम कर चुके हैं। 2018 में इस्तीफा देने के बाद भीम सिंह ने बानसूर में कोचिंग और जयपुर में कंप्यूटर लैब खोली, जिसका इस्तेमाल लीक सेंटर के रूप में किया। अब पुलिस उस मुख्य स्रोत का पता लगा रही है, जहां से प्रश्नपत्र सबसे पहले बाहर आया था। भीम सिंह JEN भर्ती-2020 के अलावा CHO भर्ती-2020, राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती-2022 और हाईकोर्ट LDC भर्ती परीक्षा के पेपर भी लीक कर चुका है।

एक ही भर्ती, दो बार लीक किया पेपर

कनिष्ठ अभियंता परीक्षा दिसंबर 2020 में लीक के कारण निरस्त हुई थी। 12 सितंबर 2021 को जब पुनः परीक्षा हुई, तो गिरोह ने उसे भी लीक कर दिया। गैंग में भीम सिंह ने गणपत मालवाड़ा और भूपेंद्र सारण के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को जयपुर में इकट्ठा किया और टैबलेट के जरिए पेपर दिखाकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया। इस मामले में अब तक जगदीश बिश्नोई, अनिल मीणा, भूपेंद्र सारण, गणपत लाल और सुरेश को जेल भेजा जा चुका है।

कांस्टेबल भर्ती-2018: हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से इनकार किया

एक अन्य मामले में, राजस्थान हाईकोर्ट ने कांस्टेबल भर्ती-2018 पेपर लीक के आरोपी कमल कुमार वर्मा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर ने कहा कि यह संगठित अपराध है। सीसीटीवी फुटेज व साक्ष्यों से आरोपी की लिप्तता साबित हो रही है। महज लंबे समय से जेल में होने के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।

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