जयपुर। राजस्थान में गर्मियों की दस्तक के साथ ही प्रदेश की पेयजल व्यवस्था पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के ठेकेदारों ने अपने करोड़ों रुपये के बकाया भुगतान की मांग को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। गुरुवार को पिंकसिटी प्रेसक्लब में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान ठेकेदारों ने अपनी व्यथा सुनाई और सरकार को कड़ी चेतावनी दी।
जलभवन में महापड़ाव, 4500 करोड़ का गणित:-
संघर्ष समिति ARPCA के नेतृत्व में ठेकेदार वर्तमान में जलभवन में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। ठेकेदारों का कहना है कि विभाग पर उनका लगभग 4500 करोड़ रुपये बकाया है, जिसके चलते वे गहरे वित्तीय संकट में फंस चुके हैं। बकाये का विवरण कुछ इस प्रकार है:-

-JJM (जल जीवन मिशन): पिछले 33 महीनों से करीब 2600 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है।
-अमृत 2.0: इस योजना के तहत 900 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि बकाया है।
-GST: 1000 करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी पुनर्भरण (Reimbursement) भी नहीं किया गया है।
7 दिन का अल्टीमेटम, प्यासा रह सकता है राजस्थान:-
ठेकेदारों ने साफ किया है कि वे पिछले लंबे समय से ज्ञापन और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे थे, लेकिन राज्य सरकार की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। अब मजबूर होकर उन्होंने आंदोलन का रास्ता चुना है। यदि ठेकेदार अपनी चेतावनी पर अमल करते हैं, तो आने वाले दिनों में राजस्थान के शहरी और ग्रामीण इलाकों में जलापूर्ति ठप हो सकती है। मरम्मत कार्य, पाइपलाइन विस्तार और नए कनेक्शन से जुड़े सभी प्रोजेक्ट्स रुकने से जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
“अगर अगले 7 दिनों के भीतर हमारी जायज मांगों को नहीं माना गया और भुगतान प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो प्रदेशभर में पेयजल से जुड़े सभी कार्य पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे।” – संघर्ष समिति, ARPCA
21 अप्रेल को 2 घंटे बंद रहेंगे सभी पंपहाउस
प्रेसवार्ता में अपनी रणनीति साझा करते हुए ठेकेदारों ने घोषणा की है कि यदि 7 दिनों के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 21 अप्रैल को पूरे प्रदेश में PHED के सभी पंप हाउस दो घंटे के लिए बंद रखे जाएंगे। ठेकेदारों का कहना है कि वे पिछले लंबे समय से धैर्य बनाए हुए थे और लगातार ज्ञापनों के जरिए सरकार को अपनी स्थिति से अवगत करा रहे थे, लेकिन विभाग की अनदेखी ने उन्हें इस कड़े कदम के लिए मजबूर किया है। अब उनके पास आंदोलन को तेज करने के अलावा
