जयपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुके पीएचईडी (PHED) के भीतर चल रहे ‘संगठित लूट’ का अब आधिकारिक पर्दाफाश हो चुका है। ‘EXPOSE NOW’ के पास मौजूद जानकारी के मुताबिक, जल जीवन मिशन (JJM) का हर टेंडर जनता की प्यास बुझाने के लिए नहीं, बल्कि अफसरों और राजनेताओं की तिजोरियां भरने के लिए जारी किया गया था।
जितना बड़ा फर्जीवाड़ा, उतना ज्यादा कमीशन:-
एसीबी (ACB) की चार्जशीट और हमारी पड़ताल में यह साफ हो गया है कि विभाग में भ्रष्टाचार का एक ‘कमीशन चार्ट’ बना हुआ था। यहाँ नीति साफ थी— “हर कुर्सी का हिस्सा फिक्स।” तत्कालीन एसीएस सुबोध अग्रवाल और तत्कालीन मंत्री महेश जोशी की टीम ने पूरे विभाग को एक मार्केट में बदल दिया था। यहाँ फाइल की गति काम की जरूरत से नहीं, बल्कि कमीशन की रकम से तय होती थी।
5 करोड़ हो या 500 करोड़:-
JJM का कोई भी टेंडर इस खेल से अछूता नहीं रहा। चाहे प्रोजेक्ट छोटा हो या बड़ा, हर टेंडर की फाइल पर ‘कमीशन की मुहर’ लगना अनिवार्य था। PHED में हालात ये हो गए थे कि पेयजल से जुड़ा 5 करोड़ को काम हो या फिर 500 करोड़ का काम, तत्कालीन मंत्री की टीम के निर्धारित सौदेबाजी के खेल के बाद ही वो टेंडर ठेकेदारों को मिलता था। पूरे जलदाय विभाग में छोटे से बड़े इंजीनियर व ठेकेदारों को इस खेल की जानकारी थी और चढ़ावा चढ़ाने के बाद ही टेंडर मिलता था।
मंत्री और एसीएस की जुगलबंदी, लूट का मेगा प्लान:-
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह महज व्यक्तिगत भ्रष्टाचार नहीं बल्कि एक संस्थागत लूट थी। मंत्री की टीम राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर ठेकेदारों को संरक्षण देना और टेंडर सेट करना। सुबोध अग्रवाल की टीम प्रशासनिक पेचीदगियों का फायदा उठाकर फर्जीवाड़े को ‘सरकारी कागज’ पर जायज ठहराना। इन दोनों टीमों की जुगलबंदी ने राजस्थान के करोड़ों रुपये के बजट को बंदरबांट की भेंट चढ़ा दिया।
दो बसों में आई 16 हजार पन्नों की ‘पाप की पोटली’
भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी थीं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एसीबी को कोर्ट में सबूत पेश करने के लिए दो बसों में भरकर चार्जशीट लानी पड़ी। 16,000 पन्नों के इन दस्तावेजों में दर्ज है कि कैसे अफसरों ने टेंडर की दरें दोगुनी की ताकि उनका कमीशन भी दोगुना हो सके। एसीबी की चार्जशीट में सुबोध अग्रवाल को सबसे ज्यादा कमीशन मिलने के आरोप है। एसीबी इस पूरे प्रकरण में सुबोध अग्रवाल के मोबाइल की एफएसएल जांच भी कराएगी।
