बिजली विभाग के पेंशन फंड में ₹26,277 करोड़ का ‘ब्लैक होल’, दांव पर लगी 80,000 बुजुर्गों की जिंदगी !

राजस्थान के बिजली निगमों में एक बड़े वित्तीय संकट की आहट सुनाई दे रही है। जयपुर के ‘सेवा सदन’ में जुटे हजारों सेवानिवृत्त बिजली कर्मचारियों ने सरकार और निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आरोप है कि पेंशन के नाम पर स्वीकृत पैसा पेंशन फंड में जमा ही नहीं किया जा रहा है।

एक्सक्लूसिव डेटा: कहाँ गया पेंशनरों का पैसा?

बिजली निगमों पर पेंशन फंड की कुल शुद्ध देनदारी ₹26,277.25 करोड़ तक पहुँच गई है। निगमवार बकाये की स्थिति चौंकाने वाली है:

निगम का नाम बकाया राशि (करोड़ में)
जयपुर डिस्कॉम (JVVNL) ₹7,901.79
अजमेर डिस्कॉम (AVVNL) ₹7,187.05
जोधपुर डिस्कॉम (JDVVNL) ₹6,577.74
प्रसारण निगम (RVPNL) ₹2,335.84
उत्पादन निगम (RVUNL) ₹2,274.83

बड़ा आरोप: नियामक आयोग (ARR) से पेंशन के लिए पैसा तो लिया जाता है, लेकिन उसे ‘Superannuation फंड’ में जमा करने के बजाय कहीं और डाइवर्ट किया जा रहा है।

मेडिकल के नाम पर ‘सिस्टम’ का सितम

बुढ़ापे की लाठी ‘मेडिकल सुविधा’ को भी सिस्टम ने पंगु बना दिया है। PMCF Trust आज ₹40.80 करोड़ के घाटे में है।

अवैध कटौती: 2013 में नियम हटने के बावजूद, लेखाधिकारी दवाइयों पर 10% और जांचों पर 20% की ‘अवैध’ कटौती कर रहे हैं।

बिल का खेल: अस्पताल पैकेज बिल देते हैं, लेकिन विभाग जानबूझकर आइटम-वार विवरण (Bifurcation) मांगकर बुजुर्गों को चक्कर कटवा रहा है।

दरों का पेंच: निजी अस्पताल सामान्य दरों पर इलाज कर रहे हैं, लेकिन निगम सिर्फ CGHS दरों पर रिफंड दे रहा है—पेंशनरों की जेब पर सीधा डाका!

संघ की हुंकार: “अब चुप नहीं बैठेंगे”
अधिवेशन में संरक्षक हजारी लाल गुर्जर, अध्यक्ष बिशन सिंह तँवर और महामंत्री शिवचरण शर्मा ने दो टूक शब्दों में कहा:-

निजी दुकानों से खरीदी आयुर्वेद दवाओं का पुनर्भरण तुरंत शुरू हो।

अस्पतालों की मान्यता के रिन्यूअल के दौरान हुए इलाज का भुगतान न रोका जाए।

पेंशन फंड में हो रही वित्तीय अनियमितता की उच्च स्तरीय जांच हो।

चेतावनी: अगर मांगों पर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो जयपुर की सड़कों पर प्रदेशभर के बिजली पेंशनर बड़ा आंदोलन करेंगे।

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