जलदाय विभाग में ‘भ्रष्टाचार का अमृत’ ! 20 करोड़ के जुर्माने की फाइल डकार गए अफसर, दागी फर्म को अभयदान
-फर्म को टेंडरों से बाहर तो कर दिया, लेकिन 2% EMD कर दी माफ, सरकार को 20 करोड़ पहुंचाया वित्तीय नुकसान
-मामले को लेकर CMO व ACB में पहुंची शिकायत
जयपुर। भ्रष्टाचार के गढ़ बन चुके राजस्थान के जलदाय विभाग (PHED) में एक बार फिर करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। Expose Now की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) और ‘अमृत-2.0’ की निविदाओं में बड़ा खेल किया गया है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों के टेंडर हथियाने वाली फर्म मैसर्स कैलाश चंद चौधरी को ब्लैकलिस्ट होने और 20 करोड़ की भारी-भरकम पेनल्टी से बचाने के लिए विभाग के आला अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रख दिया है।
फर्जी अनुभव और कूटरचित दस्तावेजों का ‘मायाजाल’
Expose Now को मिली जानकारी के अनुसार, मैसर्स कैलाश चंद चौधरी ने वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान अमृत-2.0 और JJM की निविदाओं को हासिल करने के लिए फर्जी कार्य अनुभव प्रमाण पत्र और गलत नेटवर्थ पेश की । जोधपुर क्षेत्र की निविदा संख्या-14/2024-25 (लागत 197.45 करोड़) में फर्म की पोल तब खुली जब निविदा मूल्यांकन समिति (BEC) ने पाया कि फर्म द्वारा दिया गया अनुभव प्रमाण पत्र पूरी तरह झूठा था । इसके बावजूद, विभाग में बैठे कुछ ‘आका’ इस फर्म को बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।
जांच में दोषी, फिर भी EPC चेयरमैन की ‘मेहरबानी’?
विभागीय जांच में यह प्रमाणित हो चुका है कि फर्म द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज भुगतान के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन CWR और टंकियों के निर्माण का अनुभव फर्म ने दिखाया, वे फर्म को कार्य सबलेट होने से पहले ही बन चुके थे। इसके बावजूद, अधिकार प्राप्त खरीद समिति (EPC) के चेयरमैन डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने मुख्य अभियंता और वित्तीय सलाहकार की आपत्तियों (Dissent Notes) को दरकिनार करते हुए फर्म के पक्ष में फैसला सुना दिया। आखिर इस ‘असाधारण मेहरबानी’ के पीछे का असली खेल क्या है?
पदों का दुरुपयोग और ‘असहमति नोट’ की अनदेखी
सूत्रों के मुताबिक, 30 जनवरी 2026 की बैठक में मुख्य अभियंता (U&NRW) और वित्तीय सलाहकार (FA) ने स्पष्ट किया था कि फर्म ने ‘कोड ऑफ इंटीग्रिटी’ का उल्लंघन किया है और उसके खिलाफ RTPP नियमों के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन EPC चेयरमैन ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए इन अधिकारियों के प्रस्तावों को खारिज कर दिया। यह सीधे तौर पर राज्य सरकार को 20 करोड़ का वित्तीय नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।
अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद भी नहीं रुका ‘भ्रष्टाचार का रथ’
इस प्रकरण में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि EPC के दो सदस्य, मुख्य अभियंता दिनेश गोयल और के.डी. गुप्ता, पहले ही भ्रष्टाचार के मामले में ACB द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं। अधिकारियों के तबादले और गिरफ्तारियों के बाद भी, नई गठित समिति ने बिना किसी भौतिक साक्ष्य के फर्म को ‘क्लीन चिट’ देने की तैयारी कर ली है।
‘प्राकृतिक न्याय’ की आड़ में करोड़ों की छूट का ‘खेल’
EPC चेयरमैन द्वारा तर्क दिया जा रहा है कि वित्त समिति (FC) ने ‘प्राकृतिक न्याय’ के सिद्धांतों का पालन करने को कहा था। लेकिन हकीकत यह है कि इस नियम की आड़ में फर्म को ब्लैकलिस्ट होने से बचाया जा रहा है । विभाग अब यह दावा कर रहा है कि आचार संहिता का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है, ताकि फर्म को किसी भी दंड से बचाया जा सके।
अब वित्त समिति (FC) पर टिकी निगाहें: क्या रुकेगा यह पाप?
भ्रष्टाचार का यह पूरा एजेंडा अब वित्त समिति (FC) की आगामी बैठक में अंतिम मुहर के लिए भेजा गया है । Expose Now मांग करता है कि इस पूरी प्रक्रिया को तुरंत निरस्त कर उच्च स्तरीय जांच बिठाई जाए और दोषी फर्म के साथ-साथ उसे बचाने वाले अफसरों पर FIR दर्ज हो।
क्या ‘सीएमओ’ और ‘एसीबी’ रोक पाएंगे यह बड़ा घोटाला?
इस पूरे खेल की शिकायत अब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) तक पहुँच चुकी है । Expose Now की नज़र इस बात पर है कि क्या मुख्यमंत्री इस 20 करोड़ के घोटाले पर कड़ा एक्शन लेंगे? चूंकि शिकायत में सीधे तौर पर साक्ष्य पेश किए गए हैं, ऐसे में उम्मीद है कि इस मामले में जल्द दागी फर्म के साथ-साथ उसे बचाने वाले ‘आकाओं’ के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।
