Padma Shri Poet

‘एक शाम बशीर बद्र के नाम’: वो अज़ीम शायर जिसने 85 रुपये की नौकरी से मुशायरों के बेताज बादशाह तक का सफर तय किया

"उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए।" उर्दू अदब…