पीएम विश्वकर्मा योजना: राजस्थान में सराहनीय काम, 53 हजार से अधिक लोगों को मिला ₹466 करोड़ का ऋण — केंद्रीय मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे

जयपुर, केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे मंगलवार को जयपुर दौरे पर रहीं। उन्होंने उद्योग भवन में ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की और राजस्थान द्वारा इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना की। उन्होंने कहा कि राजस्थान ने परंपरागत शिल्पकारों और कारीगरों को सशक्त बनाने की दिशा में देश में एक मिसाल पेश की है।

सिर्फ 3% ब्याज पर मिल रहा ऋण

मंत्री ने राजस्थान सरकार के उस निर्णय की विशेष प्रशंसा की, जिसके तहत योजना के लाभार्थियों को 2 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी दी जा रही है।

“केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित रियायती ब्याज दर के ऊपर राज्य की अतिरिक्त सब्सिडी के कारण राजस्थान के विश्वकर्माओं को अब मात्र 3 प्रतिशत के प्रभावी ब्याज पर ऋण उपलब्ध हो रहा है।”

राजस्थान की उपलब्धियां: देश में अग्रणी स्थान

समीक्षा बैठक के दौरान राजस्थान की प्रगति के आंकड़े प्रस्तुत किए गए, जो राज्य की सफलता को दर्शाते हैं:

  • पंजीकरण में प्रथम: स्वर्णकार, लोहार, कुम्हार और मूर्तिकार जैसे क्षेत्रों में पंजीकरण के मामले में राजस्थान देश में पहले स्थान पर है।
  • ऋण स्वीकृति में द्वितीय: बैंकों द्वारा ऋण स्वीकृत करने और वितरण में राज्य देश में दूसरे स्थान पर है।
  • प्रशिक्षण में तृतीय: टूलकिट वितरण और कारीगरों के कौशल प्रशिक्षण के क्षेत्र में राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर बना हुआ है।

राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन

उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त सुरेश कुमार ओला ने बताया कि राजस्थान का औसत ऋण ‘टिकट साइज’ 87,000 रुपये है, जो कि राष्ट्रीय औसत (83,000 रुपये) से कहीं अधिक है। 1 जनवरी, 2026 तक राज्य में 53,552 लाभार्थियों को कुल 466.70 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है।

डिजिटल और मार्केट लिंकेज से जुड़ रहे कारीगर

राज्य सरकार ने न केवल आर्थिक मदद दी है, बल्कि कारीगरों को आधुनिक बाजार से भी जोड़ा है:

  • ई-कॉमर्स: 40 से अधिक कारीगरों के उत्पादों को Amazon, Meesho और FabIndia जैसे प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड किया गया है।
  • ऑफलाइन बाजार: कारीगरों को दिल्ली हाट और विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर अपने उत्पाद बेचने के लिए मंच उपलब्ध कराया गया है।

अधिकारियों को निर्देश: बाधाएं करें दूर

करंदलाजे ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे बैंकों के साथ नियमित बैठकें करें ताकि ऋण स्वीकृति में आ रही तकनीकी परेशानियों को दूर किया जा सके। उन्होंने टूलकिट वितरण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में तेजी लाने तथा सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

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