जोधपुर: राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण आंदोलन, ‘ओरण बचाओ पदयात्रा’, जोर पकड़ रहा है। जैसलमेर के तनोट माता मंदिर से शुरू हुई यह यात्रा अब जोधपुर पहुँच चुकी है, और इसमें शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी के शामिल होने से इसे नई ऊर्जा मिली है।
बुजुर्ग को कंधे पर बैठाकर दिया संदेश:
गुरुवार रात जोधपुर के बालेसर में यात्रा के दौरान एक अत्यंत भावुक दृश्य देखने को मिला। विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने 75 वर्षीय बुजुर्ग पर्यावरण प्रेमी और आंदोलन के प्रणेता सुमेर सिंह को अपने कंधों पर बैठा लिया। उन्होंने सुमेर सिंह को कंधे पर बैठाकर करीब 1 किलोमीटर तक पैदल यात्रा की। यह एक प्रतीकात्मक संदेश था कि नई पीढ़ी को अपने बुजुर्गों के सम्मान और उनकी विरासत, ‘ओरण’, की रक्षा का भार उठाना होगा। भाटी ने अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए पूरी रात बालेसर के चामुंडा माता मंदिर में पदयात्रियों के साथ जमीन पर सोकर गुजारी।

“सच बोलने के लिए सत्ता की आँखों में आँखें डालनी पड़ती हैं”:
पदयात्रियों को संबोधित करते हुए रविंद्र सिंह भाटी ने स्पष्ट किया, “मैं न बीजेपी का हूँ, न कांग्रेस का। मुझे किसी ने कुछ दिया नहीं है, जो कुछ है जनता का दिया है। सच बोलने के लिए सत्ता की आँखों में आँखें डालकर बात करनी पड़ती है।” उन्होंने 32 दिनों से घर-बार छोड़कर ओरण, गोचर और आगौर बचाने के लिए संघर्ष कर रहे आंदोलनकारियों के जज्बे की सराहना की और कहा कि यह लड़ाई जमीन के टुकड़े की नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पर्यावरण को बचाने की है।
‘ओरण’ का महत्व:
राजस्थान के ग्रामीण जीवन में ‘ओरण’ एक पवित्र और संरक्षित वन क्षेत्र है। यहाँ सदियों से पशुओं के लिए चारागाह, प्राकृतिक जल स्रोत (आगौर) और जैव विविधता सुरक्षित रही है। देवी-देवताओं के नाम पर यहाँ पेड़ काटना वर्जित है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि ‘विकास’ और औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर इन महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों को नष्ट किया जा रहा है।
जयपुर तक जाएगी यात्रा:
सुमेर सिंह और भोपाल सिंह के नेतृत्व में यह 725 किलोमीटर लंबी पदयात्रा जयपुर तक जाएगी, ताकि सरकार का ध्यान इस महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर खींचा जा सके। इस यात्रा में 10 साल के बच्चों से लेकर 75 साल के बुजुर्ग तक शामिल हैं, जो अपनी जड़ों को बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। रविंद्र सिंह भाटी का इस आंदोलन से जुड़ना राजस्थान की युवा पीढ़ी में पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता का प्रतीक है।
