जयपुर, राजस्थान को खनिजों का हब बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। खान एवं भूविज्ञान विभाग अब मिनरल एक्सप्लोरेशन (खनिज खोज) के दौरान ड्रिलिंग से प्राप्त होने वाले ‘कोर’ (पत्थरों के नमूने) के संरक्षण के लिए नवीनतम तकनीक पर आधारित आधुनिक कोर लाइब्रेरी तैयार करेगा।
वैज्ञानिक संधारण और भविष्य की योजना
खान विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकान्त ने शुक्रवार को राजस्थान स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन (RSMET) की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि एक्सप्लोरेशन के दौरान प्राप्त कोर सैंपल्स का वैज्ञानिक तरीके से केटलॉगिंग और संधारण किया जाए। उन्होंने कहा कि ये कोर सैंपल न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य के खनन शोध के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
प्रमुख निर्णय और निर्देश:
- नागपुर का अध्ययन दौरा: राजस्थान के तीन अधिकारियों का एक दल इसी माह मिनरल एक्सप्लोरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (MECL), नागपुर की कोर लाइब्रेरी का अध्ययन करने जाएगा। वहां की तकनीक और व्यवस्थाओं के आधार पर राजस्थान में रूपरेखा तैयार की जाएगी।
- SOP का निर्धारण: एक्सप्लोरेशन, ड्रिलिंग और सैंपल्स के विश्लेषण के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाई जाएगी। इसमें कार्यों की समयसीमा और अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
- अवैध खनन पर लगाम: रविकान्त ने स्पष्ट किया कि अवैध खनन को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका ‘वैध खनन’ को बढ़ावा देना है। इसके लिए नई माइनिंग ब्लॉक्स की खोज और नीलामी प्रक्रिया को गति दी जाएगी।
कोर लाइब्रेरी क्या है और क्यों है जरूरी?
जब जमीन के नीचे खनिजों की खोज के लिए ड्रिलिंग की जाती है, तो बेलनाकार पत्थर के नमूने निकलते हैं जिन्हें ‘कोर’ कहा जाता है।
- डेटा संचय: ये कोर बताते हैं कि कितनी गहराई पर कौन सा खनिज उपलब्ध है।
- लागत की बचत: भविष्य में नई तकनीक आने पर इन्हीं नमूनों की पुनः जांच की जा सकती है, जिससे दोबारा महंगी ड्रिलिंग नहीं करनी पड़ती।
- वैज्ञानिक विश्लेषण: आधुनिक लाइब्रेरी में इन्हें विशेष तापमान और व्यवस्थित केटलॉगिंग के साथ रखा जाता है।
बैठक में आरएसएमईटी के मुख्य कार्यकारी आलोक प्रकाश जैन, निदेशक माइंस महावीर प्रसाद मीणा सहित जीएसआई (GSI), आईबीएम (IBM) और एमईसीएल (MECL) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
