जयपुर | राजस्थान के जल जीवन मिशन (JJM) में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई ने महकमे में हड़कंप मचा रखा है। 17 फरवरी को ACB ने PHED के 9 अधिकारियों समेत 10 लोगों को सलाखों के पीछे भेजकर अपनी मंशा साफ कर दी थी, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल उन 139 इंजीनियरों पर आकर टिक गया है, जिन्होंने फील्ड में रहकर भ्रष्टाचार की इस ‘पाइपलाइन’ को बिछाया।
फर्जी अनुभव, असली भुगतान: घोटाले की पूरी कहानी
जांच में सामने आया है कि मैसर्स श्याम ट्यूबवेल और मैसर्स गणपति ट्यूबवेल नामक फर्मों ने केरल में इरकॉन (IRCON) कंपनी के नाम पर फर्जी कार्य अनुभव प्रमाण पत्र बनवाए। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ही राजस्थान में करोड़ों के कार्यादेश (Work Orders) हासिल किए गए। हैरानी की बात यह है कि इन फर्मों के खिलाफ शिकायतें होने के बावजूद PHED के आला अधिकारियों ने इन्हें क्लीन चिट दी और काम जारी रखा। इसी के चलते ACB ने हाल ही में बड़ी गिरफ्तारी की थी।
139 इंजीनियरों की ‘जुगलबंदी’ और 587 करोड़ का खेल
सूत्रों और दस्तावेजों के मुताबिक, साल 2020 से 2023 के बीच कुल 960 करोड़ रुपये के जेजेएम कार्यों में धांधली हुई। इसमें से 587 करोड़ रुपये के कार्यों में इन 139 इंजीनियरों की सीधी मिलीभगत सामने आ रही है।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
- कागजों में दौड़ी पाइपलाइन: फील्ड में तैनात इन इंजीनियरों ने फर्मों के साथ मिलकर ‘माप पुस्तिका’ (MB) में फर्जी एंट्री की।
- सामग्री का हेरफेर: DI पाइप की जगह घटिया HDPE पाइप डाल दिए गए। कई जगह तो बिना पाइपलाइन डाले ही पुरानी लाइनों को नया दिखाकर भुगतान उठा लिया गया।
- चोरी का माल: हरियाणा से चोरी के पाइप लाकर उन्हें जेजेएम की योजनाओं में खपाया गया और सरकार से नए पाइपों के नाम पर मोटी रकम वसूली गई।
फील्ड के ‘खिलाड़ी’ अभी भी गिरफ्त से बाहर
जिन अधिकारियों को 17 फरवरी को गिरफ्तार किया गया, उन्होंने तो केवल कागजी वर्क ऑर्डर जारी किए थे। लेकिन भ्रष्टाचार की असली फसल तो फील्ड में इन 139 इंजीनियरों ने काटी। इन्होंने न केवल फर्जी एम.बी. भरी, बल्कि बिना कार्य पूर्ण हुए ही करोड़ों के बिल पास कर दिए। विभाग में चर्चा है कि जब तक इन 139 चेहरों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक न्याय अधूरा है।
बड़े नाम, बड़े रसूख: सुबोध अग्रवाल अभी भी फरार
इस पूरे खेल के पीछे के ‘मास्टरमाइंड’ और PHED के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) व वर्तमान रिटायर्ड IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल अभी भी फरार चल रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि उनकी गिरफ्तारी से कई और सफेदपोश चेहरों से नकाब उतर सकता है।
मुख्य बिंदु: एक नज़र में
| विवरण | आंकड़े/तथ्य |
| कुल घोटाला क्षेत्र | जल जीवन मिशन (2020-2023) |
| दागी फर्म | मैसर्स श्याम ट्यूबवेल, मैसर्स गणपति ट्यूबवेल |
| रडार पर इंजीनियर | 139 अधिकारी |
| फर्जी भुगतान की राशि | ₹587 करोड़ (960 करोड़ के कुल कार्यों में से) |
| मुख्य आरोप | फर्जी अनुभव पत्र, चोरी के पाइप, कागजों में काम |
एक्सक्लूसिव खुलासा: प्रमाणित भ्रष्टाचार के बावजूद ‘अभयदान’ क्यों?
सवालिया निशान: 139 इंजीनियरों पर मेहरबानी या मजबूरी?
- विभाग की दोहरी चाल: मीडिया में खबरें आने और भ्रष्टाचार प्रमाणित होने के बाद PHED ने इन 139 इंजीनियरों को 16-CC (Charge Sheet) तो थमा दी है, लेकिन यह केवल एक विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई है। सवाल यह है कि सैकड़ों करोड़ के गबन में केवल विभागीय नोटिस ही काफी है?
- ACB की दूरी पर सस्पेंस: जब ACB ने फर्जी अनुभव पत्र के आधार पर वर्क ऑर्डर देने वाले अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया, तो फील्ड में फर्जी एम.बी. (Measurement Book) भरकर जनता के करोड़ों रुपये लुटाने वाले ये 139 इंजीनियर अब तक ‘सलाखों’ से दूर क्यों हैं?
- FIR में देरी का राज: PHED ने इन दागियों के खिलाफ अभी तक ACB में एफआईआर (FIR) दर्ज क्यों नहीं करवाई? क्या विभाग अपने ही अधिकारियों को बचाने के लिए कानूनी प्रक्रिया को ‘धीमी आंच’ पर पका रहा है?
- प्रमाणित भ्रष्टाचार, फिर भी ढील: जांच में यह साफ हो चुका है कि 960 करोड़ के कार्यों में से 587 करोड़ का भुगतान इन्हीं इंजीनियरों की मिलीभगत से हुआ। चोरी के पाइप और फर्जी एंट्री जैसे पुख्ता सबूतों के बाद भी ‘गिरफ्तारी’ का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
अगला बड़ा कदम: कानूनी घेराबंदी या सिर्फ खानापूर्ति?
विभागीय सूत्रों का कहना है कि 16-CC जारी करना केवल एक ‘प्रक्रिया’ है, जबकि असली न्याय तब होगा जब इन सभी 139 इंजीनियरों से भ्रष्टाचार की राशि की वसूली की जाए और उन्हें आपराधिक साजिश के तहत गिरफ्तार किया जाए। बड़ा सवाल यही है कि क्या ACB अब उन 139 इंजीनियरों के घरों पर दस्तक देगी जिन्होंने जनता के हक के पैसे को फर्मों के साथ मिलकर डकारा? राजस्थान की जनता अब कार्रवाई का इंतजार कर रही है।
