जयपुर: राजस्थान में न्याय और चिकित्सा प्रणाली के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रदेश में पहली बार ‘मेडिको-लीगल मैनुअल-2025’ लागू किया गया है, जिसके तहत राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों (पीएचसी से लेकर मेडिकल कॉलेज स्तर तक) में मेडिको-लीगल केस (MLC) और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब एक एकीकृत और मानकीकृत (Standardized) प्रारूप में तैयार की जाएंगी।
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
अब तक प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में रिपोर्ट तैयार करने के अलग-अलग प्रारूप थे, जिसके कारण उनमें असमानता और तकनीकी खामियां रह जाती थीं। अक्सर इन तकनीकी कमियों का लाभ कानूनी कार्यवाही के दौरान आरोपियों को मिल जाता था। राज्य सरकार ने विशेषज्ञों की एक ड्राफ्ट समिति गठित कर करीब 11 माह तक गहन अध्ययन किया, जिसके बाद इस मैनुअल को अंतिम रूप दिया गया।
कानून और न्यायपालिका के अनुरूप नया मैनुअल
यह नया मैनुअल राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देशों और हाल ही में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता-2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम-2023 के प्रावधानों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सभी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अब ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से इसी नए मानकीकृत प्रारूप में रिपोर्ट तैयार करें।
नई व्यवस्था के मुख्य लाभ:
- एकरूपता और पारदर्शिता: पीएचसी से लेकर मेडिकल कॉलेज तक रिपोर्ट का फॉर्मेट एक जैसा होगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
- न्यायिक मजबूती: पुलिस और अदालतों को अधिक सटीक, स्पष्ट और विधिसम्मत रिपोर्ट मिलेंगी, जिससे अभियोजन प्रक्रिया मजबूत होगी।
- समयबद्धता: ऑनलाइन पोर्टल पर रिपोर्ट तैयार होने से कार्य में तेजी आएगी और चिकित्सकों व पुलिस को बार-बार होने वाली परेशानियों से निजात मिलेगी।
- तकनीकी खामियों का खात्मा: मानकीकृत प्रक्रिया के कारण रिपोर्ट की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
