जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी (DoIT) विभाग में कथित भ्रष्टाचार के मामले में ढिलाई बरतने पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए चेतावनी दी है कि यदि भ्रष्टाचारियों को बचाया जा रहा है, तो भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारी भी उतने ही दोषी माने जाएंगे और कार्रवाई से कोई भी बच नहीं पाएगा। कोर्ट ने मामले की सुनवाई 9 मार्च तक टालते हुए एसीबी को अगली तारीख तक कड़ी कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
“क्या ऊपर के स्तर पर भ्रष्टाचार नहीं होता?”
सोमवार को न्यायाधीश अशोक कुमार जैन की अदालत में डॉ. टी.एन. शर्मा की याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एसीबी के कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे।
- यह बात सामने आई कि एसीबी ने पिछले 3-4 महीनों में केवल 16 कार्रवाइयां की हैं।
- इनमें पकड़े गए 5 अधिकारी क्लास-बी (Class-B) के और 11 क्लास-सी (Class-C) के छोटे कर्मचारी थे।
- इन कार्रवाइयों में सबसे बड़ा अधिकारी एक ‘तहसीलदार’ स्तर का था।
- इस पर हाईकोर्ट ने कड़ा ऐतराज जताते हुए मौखिक रूप से पूछा कि “क्या इसका मतलब यह है कि सिर्फ छोटे स्तर पर ही भ्रष्टाचार है, क्या ऊपर के स्तर पर भ्रष्टाचार नहीं है?”।
कोर्ट ने ACB डीआईजी को दी सख्त चेतावनी
सुनवाई के दौरान एसीबी की ओर से उपमहानिरीक्षक (DIG) आनंद शर्मा कोर्ट में हाजिर हुए और जांच के लिए और समय मांगा। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आपको पहले ही काफी समय दिया जा चुका है और अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
कोर्ट ने डीआईजी शर्मा को सीधे चेतावनी देते हुए कहा, “आप भ्रष्टाचारियों को बचा रहे हो, तो कोर्ट दोषी मानकर आपके खिलाफ कार्रवाई करेगा”। कोर्ट ने निर्देश दिए कि संबंधित अधिकारियों को बुलाकर पूछताछ की जाए और उनकी कॉल डिटेल (Call Details) निकाली जाए। जब डीआईजी ने कहा कि वे वित्तीय जानकारी जुटा रहे हैं, तो कोर्ट ने दोटूक लहजे में कहा कि “इससे काम चलने वाला नहीं है”।
27 शिकायतें दीं, लेकिन कार्रवाई सिफर
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी ने कोर्ट को एक चौंकाने वाली जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अदालती आदेश के बाद दस्तावेजों सहित कुल 27 शिकायतें भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (ACB) को सौंपी गई थीं। लेकिन एसीबी ने इनमें से किसी भी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की।
वहीं, अपना बचाव करते हुए डीआईजी ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने सरकार से 4 ऑडिट टीमें मांगी हैं और फिलहाल 8 टेंडरों की स्कैनिंग की जा रही है।
