जयपुर: राजस्थान के सरकारी स्कूलों से शिक्षा के क्षेत्र में एक बेहद सकारात्मक और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। शिक्षा विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्राओं (बालिकाओं) का कुल नामांकन छात्रों (बालकों) के मुकाबले लगभग 5 लाख (4,99,955) अधिक पहुंच गया है। विभाग की इस रिपोर्ट के मुताबिक, केवल नर्सरी कक्षा को छोड़कर बाकी सभी कक्षाओं में छात्रों की संख्या की तुलना में छात्राओं की संख्या काफी अधिक दर्ज की गई है।

नर्सरी को छोड़कर हर कक्षा में छात्राएं आगे

जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, प्रदेशभर की विभिन्न कक्षाओं में लड़कियों का दबदबा साफ नजर आ रहा है। पहली कक्षा से ही छात्र और छात्राओं के नामांकन में अंतर बढ़ने लगता है:
- एलकेजी (LKG): छात्र 10,461 | छात्राएं 10,911 (छात्राएं 450 अधिक)
- यूकेजी (UKG): छात्र 11,862 | छात्राएं 12,459 (छात्राएं 597 अधिक)
- कक्षा 1: छात्र 2,93,563 | छात्राएं 3,10,632 (छात्राएं 17,069 अधिक)
- कक्षा 5: छात्र 3,05,185 | छात्राएं 3,44,992 (छात्राएं 39,807 अधिक)
- कक्षा 8: छात्र 3,18,280 | छात्राएं 3,75,126 (छात्राएं 56,846 अधिक)
10वीं कक्षा में दिखा सबसे बड़ा अंतर
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में सबसे अधिक अंतर 10वीं कक्षा में देखने को मिला है। कक्षा 10वीं में लड़कियों की संख्या लड़कों से 66,495 अधिक है। इस कक्षा में कुल छात्राओं की संख्या 3 लाख 20 हजार 391 है, जबकि छात्रों की संख्या 2 लाख 53 हजार 896 है। इसके अलावा कक्षा 12 में छात्राओं की संख्या 58,145 और कक्षा 8 में 56,846 अधिक है। अन्य सभी कक्षाओं में भी यह अंतर 50 हजार से कम है। वर्तमान में सरकारी स्कूलों में कुल 72,48,752 विद्यार्थियों का नामांकन है, जिसमें 38,74,349 लड़कियां और 33,74,394 लड़के शामिल हैं।

जयपुर जिले में भी बेटियों का पलड़ा भारी
राजधानी जयपुर की बात करें तो यहां भी लड़कियों और लड़कों के नामांकन में 27,879 का बड़ा अंतर है। जयपुर में 1 लाख 71 हजार 498 लड़कियां और 1 लाख 43 हजार 619 लड़के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। प्रदेश का एक भी जिला ऐसा नहीं है जहां लड़कों की संख्या लड़कियों से अधिक हो। केवल नर्सरी कक्षा में ही छात्रों का कुल नामांकन 7,150 और छात्राओं का 6,985 है, जिससे वहां छात्रों की संख्या 165 अधिक है, बाकी सभी कक्षाओं में छात्राएं ही आगे हैं।
योजनाओं का मिल रहा है लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश के सभी जिलों में बालिकाओं के नामांकन के पीछे सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाएं बड़ी वजह हैं। शिक्षा विभाग में बालिका शिक्षा फाउंडेशन की ओर से गार्गी पुरस्कार, बालिका प्रोत्साहन पुरस्कार, मुख्यमंत्री हमारी बेटी योजना, पद्मावती पुरस्कार जैसी कई योजनाएं संचालित हो रही हैं। इसके अलावा लाडली प्रोत्साहन योजना, साइकिल योजना और स्कूटी योजनाओं के चलते भी सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के नामांकन में लगातार जबरदस्त इजाफा देखने को मिल रहा है।