जयपुर, जयपुर के सीतापुरा स्थित JECC में चल रहे ‘राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट 2026’ के तीसरे दिन मंगलवार को स्टार्टअप्स और निवेश की बारीकियों पर गहन मंथन हुआ। मुग्धा हॉल में आयोजित विशेष सत्र ‘इन्वेस्टर लेंस: फ्रॉम अर्ली बेट्स टू स्केल’ में देश के दिग्गज निवेशकों ने उद्यमियों को पूंजी जुटाने और बिजनेस को स्केल करने के गुर सिखाए।
पूंजी जुटाना सिर्फ पैसा नहीं, एक रणनीतिक जिम्मेदारी
सत्र की मॉडरेटिंग 121 फाइनेंस के फाउंडर डॉ. रवि मोदानी ने की। चर्चा में ‘आविष्कार’ के विनीत राय, आईआईटी ग्रोथ अपॉर्चुनिटी फंड के मोहित गुलाटी और ‘वर्लिनवेस्ट’ के अर्जुन वैद्य शामिल हुए। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि पूंजी जुटाने का निर्णय केवल वित्तीय नहीं, बल्कि एक गहन व्यक्तिगत और रणनीतिक प्रक्रिया है।
सत्र के मुख्य बिंदु:
- गवर्नेंस का दबाव: एक बार निवेशक से पूंजी लेने के बाद, संस्थापकों को निरंतर जवाबदेही और गवर्नेंस के दबाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
- अहंकार बनाम महत्वाकांक्षा: विशेषज्ञों ने चिंता जताई कि स्टार्टअप को शुरुआती सफलता मिलने के बाद अक्सर संस्थापकों का ‘ईगो’ उनकी महत्वाकांक्षा पर हावी हो जाता है। वे काम से ज्यादा पहचान (Recognition) की तलाश में जुट जाते हैं, जिससे बिजनेस की स्केलिंग प्रभावित होती है।
निवेश के तीन रास्ते: कब क्या चुनें?
पैनलिस्ट ने उद्यमियों को पूंजी और विकास के संबंध में तीन स्पष्ट रास्ते बताए, जिन पर सचेत निर्णय लेना आवश्यक है:
- स्थिरता: एक चुने हुए स्केल पर बिजनेस को स्थिर रखना।
- आक्रामक विकास: तेजी से विस्तार के लिए बड़ी पूंजी जुटाना।
- एग्जिट: सही समय पर बिजनेस से बाहर निकलना (Exit)।
विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव तब पैदा होता है जब उद्यमी बिना किसी स्पष्ट उद्देश्य के इन विकल्पों के बीच फंस जाता है।
सफलता की कुंजी: स्व-जागरूकता और मजबूत टीम
चर्चा का निष्कर्ष यह रहा कि स्टार्टअप की सफलता के लिए स्व-जागरूकता, उद्देश्य की स्पष्टता, मजबूत टीम और अनुशासित निष्पादन (Execution) सबसे महत्वपूर्ण हैं। पैनलिस्ट ने युवा उद्यमियों को प्रेरित करते हुए कहा कि पूंजी जुटाने का फैसला सोच-समझकर और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए।
Highlights of DigiFest-2026 (Day 3):
- स्थान: मुग्धा हॉल, JECC, सीतापुरा (जयपुर)।
- विषय: इन्वेस्टर लेंस: फ्रॉम अर्ली बेट्स टू स्केल।
- प्रमुख वक्ता: विनीत राय, मोहित गुलाटी, अर्जुन वैद्य और डॉ. रवि मोदानी।
