जयपुर। विदेश से एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री लेकर भारत में प्रैक्टिस करने का सपना देख रहे छात्रों के लिए नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) ने बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। आयोग ने एक सख्त आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि कोरोना काल के दौरान जिन विदेशी मेडिकल छात्रों (FMG) ने ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई की थी, उन्हें अब उस अवधि के बराबर अनिवार्य रूप से फिजिकल ऑनसाइट (ऑफलाइन) क्लास और क्लिनिकल ट्रेनिंग लेनी होगी।
स्टेस्ट मेडिकल काउंसिल नहीं देगी रजिस्ट्रेशन:
एनएमसी सचिव डॉ. राघव लांगर की ओर से जारी आदेश के अनुसार, यदि कोई छात्र इस ‘ऑफलाइन भरपाई’ (Compensation) को पूरा नहीं करता है, तो स्टेट मेडिकल काउंसिल (SMC) उसे परमानेंट रजिस्ट्रेशन जारी नहीं करेगी। यह नियम मुख्य रूप से 2020 और 2021 बैच के छात्रों पर लागू होगा। 5 मार्च 2026 को जारी पब्लिक नोटिस का हवाला देते हुए आयोग ने साफ किया है कि केवल वे सर्टिफिकेट मान्य होंगे जो वास्तविक ऑफलाइन ट्रेनिंग के बाद जारी किए गए हों।
दिल्ली में छात्रों का विरोध प्रदर्शन
इस आदेश से आक्रोशित और परेशान छात्र आज, सोमवार (16 मार्च) को दिल्ली स्थित एनएमसी मुख्यालय पर एकत्र हो रहे हैं। छात्र अधिकारियों से मिलकर नियमों में छूट की मांग करेंगे। छात्रों का तर्क है कि जब भारत में ऑनलाइन क्लासेज को मान्यता दी गई, तो विदेशी संस्थानों की ऑनलाइन पढ़ाई को क्यों नकारा जा रहा है।
राजस्थान मेडिकल काउंसिल ने जारी किए आदेश
एनएमसी की गाइडलाइन के बाद राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) ने भी 12 मार्च 2026 को राज्य में आदेश प्रभावी कर दिए हैं। काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी छात्र ने ऑनलाइन पढ़ाई के बाद उतनी ही अवधि की ऑफलाइन ट्रेनिंग का प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया, तो उसका परमानेंट रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा।
प्रैक्टिस के लिए अब ये हैं अनिवार्य शर्तें:
- स्क्रीनिंग टेस्ट: सबसे पहले FMGL/स्क्रीनिंग परीक्षा पास करनी होगी।
- ऑफलाइन भरपाई: ऑनलाइन पढ़ाई की अवधि के बराबर फिजिकल क्लास और ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट।
- इंटर्नशिप: एक वर्ष की अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप (CRMI) पूरी करनी होगी।
आयोग ने चेतावनी दी है कि कई विदेशी संस्थान बिना वास्तविक ट्रेनिंग के ‘कम्पेनसेशन सर्टिफिकेट’ जारी कर रहे हैं, जिन्हें पूरी तरह से अवैध माना जाएगा और उनसे प्राप्त डिग्री भारत में मान्य नहीं होगी।
