जोधपुर। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) के जोधपुर कार्यालय में एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। जोजरी नदी में बिना ट्रीटमेंट के केमिकलयुक्त पानी छोड़ने के गंभीर मामले में बोर्ड मुख्यालय ने त्वरित एक्शन लेते हुए क्षेत्र के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को गाज गिराई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जयपुर मुख्यालय से 28 मई 2026 को जारी अलग-अलग कार्यालय आदेशों (Office Orders) के तहत यह कार्रवाई की गई है:
रिजनल ऑफिसर एपीओ, दो अधिकारी तत्काल निलंबित

- कामिनी सोनगरा (Regional Officer): मुख्यालय द्वारा जारी आदेश संख्या S.no. FII(612)/RSPCB/Estt./ 3987-90 के अनुसार, जोधपुर की क्षेत्रीय अधिकारी (RO) सुश्री कामिनी सोनगरा को तत्काल प्रभाव से एपीओ (Awaiting Posting Orders) कर दिया गया है। उन्हें तुरंत जयपुर मुख्यालय में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। उनकी जगह जोधपुर (Urban) क्षेत्रीय अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दीपेंद्र झारवाल (MS SEAC-3, जोधपुर) को सौंपा गया है।
- देवेंद्र सिंह बिकुंडिया (Lab Incharge): आदेश संख्या S.no. FII(612)/RSPCB/Estt./ 3991-95 के तहत जोधपुर के लैब इंचार्ज श्री देवेंद्र सिंह बिकुंडिया को राजस्थान सिविल सेवा (CCA) नियम, 1958 के नियम 13 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspended) कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच प्रस्तावित है।
- कुणाल खत्री (AEE): इसी आदेश के तहत जोधपुर क्षेत्रीय कार्यालय के सहायक पर्यावरण अभियंता (AEE) कुणाल खत्री को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspended) कर दिया गया है।
दोनों निलंबित अधिकारियों का मुख्यालय निलंबन अवधि के दौरान जयपुर रहेगा। इन सभी आदेशों पर बोर्ड के सदस्य सचिव कपिल चंद्रवाल (Kapil Chandrawal) के हस्ताक्षर हैं।

सुप्रीम कोर्ट कमेटी की जांच में खुली पोल
प्रशासनिक महकमे में मची इस खलबली के पीछे की वजह जोजरी नदी में हो रहा भयंकर प्रदूषण है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाईपावर कमेटी ने सांगरिया स्थित सीईटीपी (CETP) प्लांट का औचक निरीक्षण किया था।
इस निरीक्षण के दौरान कमेटी ने वहां एक अवैध पाइपलाइन पकड़ी। जांच में यह बेहद गंभीर तथ्य सामने आया कि क्षेत्र की फैक्ट्रियों का दूषित और केमिकलयुक्त पानी बिना किसी ट्रीटमेंट (साफ किए) के सीधे इस अवैध पाइपलाइन के ज़रिए जोजरी नदी में छोड़ा जा रहा था। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए करीब 1 किलोमीटर लंबी इस अवैध पाइपलाइन को जेसीबी की मदद से उखाड़ फेंका और नष्ट कर दिया।
इस बड़ी लापरवाही और नियमों की धज्जियां उड़ाने के मामले में स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की भूमिका पर सवालिया निशान खड़े हुए, जिसके बाद बोर्ड मुख्यालय ने यह सख्त कदम उठाया है।
