-नामांकन व रिजल्ट गिरा, तो 346 महात्मा गांधी इंगलिश मीडियम स्कूलों को बंद करे का लिया निर्णय, शिक्षा मंत्री व अधिकारियों के फेलियर का खामियाजा भुगतेंगे गरीब बच्चें!
जयपुर। प्रदेश के शिक्षा विभाग से इस वक्त की सबसे बड़ी और शर्मनाक खबर आ रही है! एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया और ग्लोबल एजुकेशन की बातें करती है, तो दूसरी तरफ प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के कार्यकाल में सरकारी शिक्षा तंत्र पूरी तरह फेल होता नजर आ रहा है। विभाग की नाकामी इस कदर हावी हो चुकी है कि अपनी कमियों को छिपाने के लिए अब चलती हुई व्यवस्थाओं को ही बदला जा रहा है।
ताजा मामला महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का है, जहां शिक्षा मंत्री के लचर मैनेजमेंट के कारण 346 स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम को कम करके वहां जबरन हिंदी माध्यम थोपा जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या गरीब, मजदूर और किसान के बच्चों को अंग्रेजी शिक्षा पाने का अधिकार नहीं है?
दिलावर का ‘फेलियर मॉडल’, एडमिशन घटे तो बंद कर दो अंग्रेजी माध्यम:-

शिक्षा विभाग के आधिकारिक नोट शीट से जो खुलासा हुआ है, वह मदन दिलावर के कार्यकाल की नीतियों पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। मंत्री कार्यालय से जारी नोट शीट में साफ लिखा है कि 346 महात्मा गांधी स्कूलों में विद्यार्थियों का नामांकन ‘अत्यंत न्यून’ (बेहद कम) है। होना तो यह चाहिए था कि शिक्षा मंत्री इन स्कूलों में घटते एडमिशन के कारणों का पता लगाते, शिक्षकों की कमी दूर करते और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारते। लेकिन अपनी नाकामी छुपाने के लिए उन्होंने शॉर्टकट अपनाया और आदेश जारी कर दिया कि इन स्कूलों को अविलम्ब हिंदी माध्यम में भी संचालित किया जाए। क्या यह स्कूलों को धीरे-धीरे बंद करने की साजिश है? जनता और जानकारों का सीधा आरोप है कि एडमिशन कम होने के नाम पर पहले अंग्रेजी स्कूलों को हिंदी में बदलो और फिर कुछ समय बाद धीरे से पूरा स्कूल ही बंद कर दो।
नेताओं-अफसरों के बच्चे कॉन्वेंट में, गरीब का बच्चा क्यों भुगते?
Expose Now इस नीति पर सीधा प्रहार करता है। आज प्रदेश की जनता शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से कुछ कड़े सवाल पूछ रही है:
-दोहरा मापदंड क्यों? नेताओं और बड़े अधिकारियों के बच्चे तो मंहगे प्राइवेट और इंटरनेशनल इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ेंगे, लेकिन गरीब का बच्चा जब सरकारी स्कूल में अंग्रेजी पढ़ने जाएगा, तो उसे हिंदी थमा दी जाएगी?
-एडमिशन कम क्यों हुए? मदन दिलावर जी, आपके कार्यकाल में इन स्कूलों में दाखिले कम क्यों हुए? क्या विभाग योग्य अंग्रेजी शिक्षकों की भर्ती करने और बेहतर माहौल देने में पूरी तरह फेल साबित हुआ है?
-सुधार से पीछे क्यों हटे? सरकारी तंत्र अपनी नाकामी छुपाने के लिए इन 346 स्कूलों का माध्यम बदलने का फैसला ले रहा है, जो गरीब छात्रों के भविष्य के साथ सीधे-सीधे खिलवाड़ है।
आखिर कब तक चलेगी यह ‘अजीब कला’:-
सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के बीच अब यह आक्रोश भड़क चुका है कि यह कैसी व्यवस्था है जहां सुधार करने के बजाय सीधे हाथ खड़े कर दिए जाते हैं। 346 स्कूलों को अंग्रेजी से हिंदी में बदलने का यह फैसला शिक्षा विभाग और खुद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के कार्यकाल का सबसे बड़ा फेलियर माना जा रहा है। गरीब बच्चों के हक पर डाका डालने वाले इस फैसले के बाद क्या शिक्षा मंत्री अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेंगे, या फिर इसी तरह ‘नामांकन कम’ होने का ठीकरा बच्चों के सिर फोड़कर सरकारी व्यवस्थाओं को कमजोर किया जाता रहेगा?
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now
