बीकानेर। संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल (PBM Hospital) में सीटी-एमआरआई (CT-MRI) टेंडर विवाद अभी थमा भी नहीं था कि अब ‘मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी’ के तहत 25 करोड़ रुपये के तीन नए टेंडरों में भारी गड़बड़ी का मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने अपनी ‘मनचाही फर्मों’ को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों को सुविधा के अनुसार बदल दिया।
मामला मीडिया में आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है और आनन-फानन में 5 करोड़ रुपये का एक विवादित ‘नारकोटिक्स ड्रग्स’ टेंडर निरस्त कर दिया गया है।
25 करोड़ के तीन टेंडरों में कैसे हुआ ‘खेल’?
भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल में सुरक्षा, सफाई और वार्ड बॉय के तीन अलग-अलग टेंडरों की शर्तों में चहेती फर्मों को लाभ देने के लिए फेरबदल किया गया है। जानिए इनमें क्या बदलाव हुए:
- सफाई का टेंडर (6 करोड़ रुपये): इस टेंडर का वर्क ऑर्डर जारी भी हो चुका है और काम शुरू करवा दिया गया है। इसमें पहली बार अनुभव के आधार पर ‘अंक’ (Marks) देने की प्रणाली लागू की गई। मसलन, 1000 बेड के अस्पताल के अनुभव पर 2 अंक, 1500 बेड पर 4 अंक और 2000 से अधिक बेड के अस्पताल के अनुभव पर 6 अंक निर्धारित किए गए। चूँकि एक ही फर्म के पास ऐसा अनुभव था, इसलिए सीधा फायदा उसी को मिला।
- सुरक्षाकर्मियों का टेंडर (10 करोड़ रुपये): 300 सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराने के इस टेंडर में पहले 33 प्रतिशत काम एक ही जगह करने का अनुभव मांगा गया था, जिसे बाद में हटा दिया गया। प्रकाशन नहीं होने का बहाना बनाकर इसे निरस्त किया गया और 13 फरवरी को दोबारा टेंडर लगा दिया गया।
- वार्ड बॉय टेंडर (9 करोड़ रुपये): 300 कार्य बिंदुओं पर वार्ड बॉय उपलब्ध कराने के लिए 33 प्रतिशत अकुशल श्रमिक का अनुभव मांग लिया गया, ताकि एक विशेष फर्म को इसका लाभ मिल सके।
मीडिया के खुलासे के बाद ‘नारकोटिक्स ड्रग टेंडर’ निरस्त
पीबीएम प्रशासन ने एनेस्थिसिया में काम आने वाली 5 करोड़ रुपये की 104 दवाओं की आरसी (RC) की थी। इसमें गुपचुप तरीके से 6 ‘नारकोटिक्स ड्रग’ (Narcotics Drugs) भी शामिल कर लिए गए, जबकि नियमतः नारकोटिक्स ड्रग की सरकारी सप्लाई निशुल्क होती है। अखबार में मामला उजागर होने के बाद अस्पताल प्रशासन बैकफुट पर आ गया और इस टेंडर को तुरंत निरस्त कर दिया गया।
किसने क्या कहा?
- डॉ. बीसी घीया (अधीक्षक, पीबीएम अस्पताल): “टेंडर नियमानुसार ही बनाए गए हैं। इससे कंपटीशन बढ़ेगा। हमारा उद्देश्य है कि काम अच्छा होना चाहिए।”
- धर्मेंद्र सिंह खींवसर (सदस्य, RMRS): “पीबीएम के टेंडरों में गड़बड़ियां हो रही हैं। फर्म विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए शर्तों में मनमाने बदलाव किए जा रहे हैं। इसकी शिकायत चिकित्सा सचिव और संभागीय आयुक्त से की गई है।”
