अजमेर के आदर्श नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पर्वतपुरा इलाके में रविवार को एक पारिवारिक जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। पूर्व राज्य मंत्री स्वर्गीय मदन सिंह रावत के बेटों के बीच हुए इस संघर्ष में उनके एक बेटे, बलवीर सिंह रावत की जान चली गई। इस वारदात के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है और पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
गेट निर्माण को लेकर छिड़ा विवाद
जानकारी के अनुसार, विवाद की मुख्य वजह संपत्ति का बंटवारा है। मृतक बलवीर सिंह रावत, जो पेशे से अधिवक्ता थे, अपने हिस्से की जमीन पर गेट का निर्माण करवा रहे थे। जैसे ही वहां निर्माण सामग्री डाली गई, बड़े भाई भगवान सिंह अपनी पत्नी और बेटे के साथ वहां पहुँच गए और विरोध शुरू कर दिया।
धक्का-मुक्की और सिर में चोट बनी मौत का कारण
भाइयों के बीच शुरू हुई कहासुनी देखते ही देखते मारपीट में तब्दील हो गई। चश्मदीदों के मुताबिक, बीच-बचाव करने पहुंचे बलवीर सिंह को जोरदार धक्का दिया गया, जिससे वे जमीन पर गिर पड़े। सिर में गंभीर चोट आने के कारण वे मौके पर ही बेहोश हो गए। उन्हें तुरंत जवाहरलाल नेहरू अस्पताल (जेएलएन) ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मंत्री के जीवनकाल में ही हो चुका था बंटवारा
परिजनों ने बताया कि पूर्व मंत्री मदन सिंह रावत का निधन वर्ष 2024 में हुआ था और उन्होंने अपने जीवित रहते ही चारों बेटों के बीच संपत्ति का स्पष्ट बंटवारा कर दिया था। मृतक के भाई पुष्पेंद्र सिंह का आरोप है कि बड़ा भाई भगवान सिंह बलवीर के हिस्से की जमीन पर अवैध दावा करना चाहता था, जिसके कारण आए दिन घर में विवाद होता था।
पुलिस की कार्रवाई और क्षेत्र में तनाव
आदर्श नगर थाना पुलिस ने पुष्पेंद्र सिंह की शिकायत पर भगवान सिंह और उनके परिवार के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। पर्वतपुरा क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर साक्ष्य जुटाने में लगी है।
