पंजीकरण कहीं… इलाज कहीं और! राजस्थान में डॉक्टरों की ट्रैकिंग में बड़ी खामी, RMC ने निजी अस्पतालों से मांगा ‘कच्चा-चिट्ठा’

राजस्थान के चिकित्सा क्षेत्र में ‘अवैध प्रैक्टिस’ और ‘फर्जी डॉक्टरों’ के बढ़ते मकड़जाल को देखते हुए राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) ने कड़ा रुख अपनाया है। काउंसिल ने प्रदेश के सभी निजी अस्पतालों को अल्टीमेटम देते हुए वहां कार्यरत डॉक्टरों के पंजीकरण का पूरा विवरण मांगा है। राष्ट्रीय स्तर पर डेटाबेस की कमी के कारण कई डॉक्टर एक राज्य में पंजीकृत होकर दूसरे राज्य में बिना अनुमति के धड़ल्ले से ऑपरेशन और इलाज कर रहे हैं।

नियम सख्त, लेकिन सिस्टम में ‘छेद’

नियमों के मुताबिक, राजस्थान में मरीजों का इलाज करने के लिए राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण अनिवार्य है। लेकिन वर्तमान में ऐसी कोई ‘रियल-टाइम ट्रैकिंग’ व्यवस्था नहीं है जिससे यह पता चल सके कि पड़ोसी राज्यों के डॉक्टर यहाँ बिना पंजीकरण के प्रैक्टिस कर रहे हैं या नहीं। प्रदेश में फिलहाल 80 से 82 हजार डॉक्टर पंजीकृत हैं, लेकिन अवैध रूप से प्रैक्टिस करने वालों की संख्या का कोई सटीक आंकड़ा मौजूद नहीं है।

3 साल बाद भी ‘यूनिक आईडी’ का इंतज़ार

चिकित्सा जगत में पारदर्शिता लाने के लिए संसदीय समिति ने तीन साल पहले ‘यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर’ की सिफारिश की थी, जिसे नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) स्तर पर लागू किया जाना था। अमेरिका के ‘जीएमई ट्रैक’ की तर्ज पर भारत में भी एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म की आवश्यकता है, जिससे डॉक्टरों के ‘डुप्लीकेट पंजीकरण’ खत्म हो सकें। सिस्टम की इसी ढिलाई का फायदा उठाकर कई झोलाछाप और फर्जी डिग्रीधारी डॉक्टर भी अपनी जड़ें जमा रहे हैं।

रजिस्ट्रार की चेतावनी: “भारी पड़ सकता है अवैध इलाज”

आरएमसी के रजिस्ट्रार डॉ. गिरधर गोयल ने स्पष्ट किया है कि एक राज्य में पंजीकरण के आधार पर दूसरे राज्य में सीधे जाकर इलाज करना गैर-कानूनी है। उन्होंने कहा:

“हमने सभी निजी अस्पतालों से डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन विवरण मांगे हैं। इससे हमें उनका भौतिक सत्यापन (Verification) करने में मदद मिलेगी। दूसरे राज्यों के डॉक्टर राजस्थान में आकर ऑपरेशन या विशेष प्रक्रियाएं नहीं कर सकते, जब तक कि वे यहाँ पंजीकृत न हों।”

जिम्मेदारी तय करना हुआ जटिल

हाल ही में प्रदेश में सामने आए फर्जी डॉक्टरों के मामलों ने काउंसिल की नींद उड़ा दी है। जब कोई बाहरी डॉक्टर किसी निजी अस्पताल में बिना रिकॉर्ड के ऑपरेशन करता है और कोई अनहोनी हो जाती है, तो कानूनी तौर पर जिम्मेदारी तय करना काफी जटिल हो जाता है। आरएमसी की इस नई मुहिम से उन ‘फ्लाइंग डॉक्टर्स’ पर नकेल कसेगी जो कागजों में कहीं और हैं और अस्पताल के कमरों में कहीं और।

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