जयपुर। राजस्थान के बिजली विभाग में भ्रष्टाचार और सेटिंग के खेल का एक और काला अध्याय सामने आ रहा है, जिसे लेकर महकमे में जबरदस्त चर्चा है। जयपुर की तीन बड़ी “पावर” फर्मों— मैसर्स भंवरिया, मैसर्स इंडिया कमर्शियल और मैसर्स स्वास्तिक इन्फ्रा लिमिटेड के भविष्य पर अनिश्चितता की तलवार लटक गई है। सूत्रों की मानें तो एक गोपनीय शिकायत ने इन फर्मों के ‘इलेक्ट्रिकल लाइसेंस’ की वैधता पर ऐसे सवाल खड़े किए हैं, जिसने सचिवालय से लेकर डिस्कॉम के दफ्तरों तक हड़कंप मचा दिया है।
‘एडवर्स’ रिपोर्ट ने उड़ाई नींद-
मामले की जड़ इन फर्मों के इलेक्ट्रिकल लाइसेंस से जुड़ी है। ऊर्जा विभाग के निर्देश पर सीनियर इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर ने एक “फैक्चुअल रिपोर्ट” तैयार की थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इंस्पेक्टर ने केवल आंकड़े पेश नहीं किए, बल्कि रिपोर्ट के साथ एक “एडवर्स टिप्पणी” (प्रतिकूल टिप्पणी) भी नत्थी की है। तकनीकी और प्रशासनिक भाषा में इस तरह की टिप्पणी का मतलब साफ है—दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।
करोड़ों के प्रोजेक्ट्स दांव पर
इन तीनों फर्मों का रसूख इसी बात से समझा जा सकता है कि इनके पास राजस्थान की विभिन्न बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) में करोड़ों रुपये के काम चल रहे हैं। अगर जांच की आंच इन फर्मों के लाइसेंस तक पहुंचती है, तो प्रदेश के कई बड़े बिजली प्रोजेक्ट्स अधर में लटक सकते हैं। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस फर्जीवाड़े के खेल से न केवल अन्य कंपनियां, बल्कि विभाग के अधिकारी भी इस मामले के उजागर होने से घबरा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इन गलत इलेक्ट्रिक लाइसेंसों के आधार पर फर्मों से बिजली विभाग में हजारों करोड़ के काम हासिल कर रखे हैं, जिससे कि अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
अब सवाल उठता है कि क्या ऊर्जा विभाग इन रसूखदार फर्मों पर कार्रवाई का साहस दिखा पाएगा, या फिर “एडवर्स टिप्पणी” फाइलों के नीचे ही दबकर रह जाएगी? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि जयपुर के बिजली महकमे में यह एक बड़े तूफान से पहले की शांति है।
