पावर सेक्टर में नया ‘पावर हाउस’: राजस्थान के बिजली तंत्र की ‘सुपर बॉस’ बनीं IAS आरती डोगरा

रिपोर्ट: राखी सिंह

जयपुर। राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश के बिजली तंत्र को सुधारने के लिए अपने सबसे भरोसेमंद और ‘दबंग’ प्रशासनिक चेहरे आरती डोगरा (IAS 2006) पर सबसे बड़ा दांव खेला है। पिछले करीब 18 महीनों से CMD डिस्कॉम्स और MD जयपुर डिस्कॉम की दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहीं आरती डोगरा को अब ऊर्जा विभाग की ‘सुपर बॉस’ बना दिया गया है।

नई तबादला सूची में सरकार ने न केवल उनके पुराने पदों पर भरोसा बरकरार रखा है, बल्कि उन्हें शासन सचिव (ऊर्जा) और अध्यक्ष (प्रसारण निगम) जैसी अति-महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंप दी हैं। अब राजस्थान के पावर सेक्टर का हर बड़ा फैसला ‘आरती डोगरा’ की मेज से होकर गुजरेगा।

18 महीने का ‘टेस्ट’ और शानदार ‘रिजल्ट’

आरती डोगरा पिछले डेढ़ साल से बिजली विभाग के सबसे चुनौतीपूर्ण पदों पर तैनात थीं। इस दौरान उनकी कार्यशैली की तीन सबसे बड़ी विशेषताएं चर्चा का विषय रहीं:

  • भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: विभाग के भीतर जड़ें जमा चुके करप्शन और ‘मिलीभगत’ वाले कल्चर को उन्होंने बखूबी तोड़ा।
  • दबंग कार्यशैली: वे एक ऐसी ‘दबंग लेडी’ के रूप में उभरीं जो किसी भी राजनैतिक या बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकीं। उनके कार्यकाल में केवल ‘नियम और पारदर्शिता’ को प्राथमिकता मिली।
  • सिस्टम में सुधार: जयपुर डिस्कॉम और प्रदेश के अन्य वितरण निगमों में रेवेन्यू कलेक्शन बढ़ाने और छीजत (Line Loss) कम करने में उनकी रणनीतियों ने जबरदस्त असर दिखाया है।

‘फुल पावर’ में आरती: चार बड़ी कुर्सियां, एक चेहरा

सरकार ने उन्हें विभाग की चार सबसे पावरफुल कुर्सियां एक साथ देकर यह साफ कर दिया है कि ऊर्जा क्षेत्र में अब काम को लेकर कोई ‘कन्फ्यूजन’ नहीं रहेगा:

  1. पॉलिसी मेकिंग (शासन सचिव): अब वे खुद विभाग के लिए नीतियां बनाएंगी।
  2. डिस्ट्रीब्यूशन (अध्यक्ष डिस्कॉम्स): प्रदेश भर में बिजली वितरण की निगरानी करेंगी।
  3. मैनेजमेंट (MD जयपुर डिस्कॉम): राजधानी और आसपास के जिलों की बिजली व्यवस्था संभालेंगी।
  4. ट्रांसमिशन (अध्यक्ष प्रसारण निगम): ग्रिड और सप्लाई लाइन का पूरा नेटवर्क देखेंगी।

डोगरा को हटाने के लिए भ्रष्ट कंपनियों ने लगाया था एड़ी-चोटी का जोर

बिजली विभाग के गलियारों में यह चर्चा आम है कि आरती डोगरा की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति से कई रसूखदार कंपनियां और ठेकेदार बुरी तरह बौखलाए हुए थे।

सूत्रों के मुताबिक, पिछले 18 महीनों में आरती डोगरा ने मैसर्स आर.सी. एंटरप्राइजेज और ए.बी. एंटरप्राइजेज जैसी कई बड़ी कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। इन कंपनियों पर बिजली विभाग के टेंडरों में धांधली और करोड़ों रुपये के गबन के गंभीर आरोप थे। डोगरा ने न केवल इनकी फाइलें खोलीं, बल्कि इन्हें कानून के शिकंजे में कसकर विभाग में एक कड़ा संदेश दिया।

कार्रवाई से परेशान होकर इन कंपनियों के ‘सिंडिकेट’ ने आरती डोगरा को बिजली विभाग से हटवाने के लिए पूरा जोर लगा रखा था। चर्चा तो यहाँ तक है कि इसके लिए करोड़ों रुपये का एक गुप्त फंड भी इकट्ठा किया गया था ताकि राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव बनाया जा सके। लेकिन, भजनलाल सरकार ने इन ताकतों के मंसूबों पर पानी फेरते हुए आरती डोगरा का कद और बढ़ाकर यह साफ कर दिया है कि ईमानदार और सख्त अधिकारियों के साथ सरकार मजबूती से खड़ी है।

कद से नहीं, कर्मों से बनाई अपनी अलग पहचान

मूलतः देहरादून की रहने वाली आरती डोगरा ने अपनी शारीरिक चुनौतियों को कभी अपनी सफलता के आड़े नहीं आने दिया। 3.5 फीट की ऊंचाई वाली इस अधिकारी ने जब यूपीएससी क्रैक किया था, तभी से वे युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई थीं। अजमेर और बीकानेर कलेक्टर के तौर पर उनके द्वारा चलाए गए अभियान (जैसे ‘बांको बीकाणो’) आज भी प्रशासनिक हलकों में मिसाल के तौर पर पेश किए जाते हैं।

“18 महीने के कार्यकाल में आरती डोगरा ने विभाग की रग-रग को समझ लिया है। अब उन्हें पूरी कमान सौंपने का मतलब है कि सरकार प्रदेश में बिजली संकट और डिस्कॉम्स के घाटे का स्थाई समाधान चाहती है।” — प्रशासनिक सूत्र

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