बीकानेर। राजस्थान में स्मार्टफोन और इंटरनेट की बढ़ती पहुंच के बीच बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से सुरक्षित रखने के लिए शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने प्रदेश के सभी स्कूलों के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है, जिसका उद्देश्य बच्चों को साइबर अपराधों, ऑनलाइन गेमिंग की लत और सोशल मीडिया के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना है।
हेल्पलाइन 1930 और रिपोर्टिंग पोर्टल पर जोर
अतिरिक्त निदेशक (प्रारंभिक शिक्षा) शैलेन्द्र देवरा द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि डिजिटल सेवाओं के तीव्र प्रसार के कारण बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों की घटनाओं में वृद्धि हुई है। इससे निपटने के लिए विभाग ने भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1930 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी या अन्य अपराधों की तुरंत रिपोर्ट की जा सके।
SOP के मुख्य बिंदु: बच्चों के लिए ‘डिजिटल कवच’
1. ऑनलाइन गेमिंग पर नियंत्रण:
- प्लेटफॉर्म्स के लिए अनिवार्य किया गया है कि वे नाबालिगों के लिए टाइम-लिमिट अलर्ट (समय सीमा चेतावनी) शामिल करें।
- गेमिंग के दौरान बच्चों की प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के निर्देश हैं।
2. सोशल मीडिया और प्राइवेसी:
- सोशल मीडिया अकाउंट्स को डिफॉल्ट रूप से “प्राइवेट” मोड पर रखने की सलाह दी गई है ताकि केवल स्वीकृत लोग ही बच्चों की प्रोफाइल देख सकें।
- हानिकारक कंटेंट (Harmful Content) की रिपोर्ट मिलने पर उसे 72 घंटों के भीतर हटाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
- बच्चों को “फैमिली रूल” सिखाया जाएगा: ऐसा कुछ भी पोस्ट न करें जिसे आप अपने परिवार या शिक्षकों को दिखाने में झिझकें।
3. अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी:
- फैमिली इंटरनेट एग्रीमेंट: माता-पिता और बच्चों के बीच एक “अनुबंध” बनाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें एप्स के उपयोग और समय सीमा का स्पष्ट उल्लेख हो।
- डिवाइस प्लेसमेंट: कंप्यूटर और टैबलेट को निजी कमरों के बजाय घर के साझा स्थानों (लिविंग रूम या किचन) में रखने की सलाह दी गई है।
- निगरानी टूल्स: बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ‘Google Family Link’ जैसे पैरेंटल कंट्रोल एप्स का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संयुक्त निदेशकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीनस्थ विद्यालयों में इस SOP की पालना सुनिश्चित करें और बच्चों के बीच साइबर जागरूकता का निरंतर प्रसार करें।
