पाली जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सदर थाने के तत्कालीन उप निरीक्षक (SI) ओमप्रकाश पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की । आरोपी पुलिस अधिकारी दहेज प्रताड़ना के एक मामले में परिवार को बचाने के लिए 25 हजार रुपये रिश्वत मांग रहा था । पुलिस थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे की वजह से आरोपी घूस की रकम लेने से बचता रहा और बाद में उसका तबादला हो गया । इसके चलते रंगे हाथों पकड़ने की एसीबी की योजना विफल रही । अब वॉयस रिकॉर्डिंग में रिश्वत की मांग स्पष्ट प्रमाणित होने पर मामला दर्ज हुआ ।
पाली के इंदिरा कॉलोनी विस्तार निवासी बाबूलाल ने 21 अक्टूबर 2025 को एसीबी में शिकायत दी थी । परिवादी ने बताया कि उसके सगाजी हेमाराम ने दो लाख रुपये का कर्ज चुकाने से बचने के लिए बाबूलाल और उसके पूरे परिवार पर सदर थाने में दहेज प्रताड़ना का झूठा मुकदमा दर्ज करवाया । मामले की जांच कर रहे तत्कालीन थानेदार ओमप्रकाश ने पूरे परिवार को गिरफ्तार करने की धमकी दी । आरोपी एसआई ने केवल बाबूलाल के बेटे मनोज को ही आरोपी बनाने और बाकी परिवार को बचाने के लिए 30 हजार रुपये की मांग रखी । परिवादी के मिन्नतें करने पर 25 हजार रुपये में सौदा तय हुआ ।
एसीबी टीम 21 और 27 अक्टूबर 2025 को दो बार वॉयस रिकॉर्डर के माध्यम से रिश्वत की मांग का सत्यापन कर चुकी थी । दूसरे सत्यापन के दिन परिवादी 5 हजार रुपये लेकर थाने पहुंचा । बातचीत के दौरान जब परिवादी ने रिश्वत की रकम एसआई को देनी चाही, तो उसने कैमरे की तरफ इशारा करते हुए रुपये लेने से इनकार किया । आरोपी ने परिवादी को बाद में फोन करके बुलाने की बात कही ।
इसके बाद कई दिनों तक एसआई ओमप्रकाश ने परिवादी को फोन नहीं किया । इस बीच आरोपी का तबादला सदर थाने से शिवपुरा थाने में हो गया । आरोपी को एसीबी की कार्रवाई का शक हो गया था, जिसके चलते उसने रिश्वत की राशि नहीं ली । रंगे हाथों पकड़ने की कार्रवाई संभव न होने पर एसीबी ने वॉयस रिकॉर्डिंग को मुख्य आधार बनाया । रिकॉर्डिंग में रिश्वत की मांग प्रमाणित होने पर 6 मार्च 2026 को आरोपी तत्कालीन उप निरीक्षक ओमप्रकाश के खिलाफ मामला दर्ज हुआ । इस प्रकरण की अग्रिम जांच एसीबी पाली-प्रथम के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र डूकिया को सौंपी गई ।
