जयपुर: राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। ‘पावर फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ और ‘रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन’ (REC) लिमिटेड द्वारा जारी एक राष्ट्रीय रिपोर्ट में राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) के प्रदर्शन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। देशभर के 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में राजस्थान अब फिसलकर 35वें स्थान पर आ गया है, जो त्रिपुरा से मात्र एक पायदान ऊपर है।
खराब प्रदर्शन के लिए मिली ‘D’ ग्रेड
रिपोर्ट के अनुसार, RERC को 100 में से मात्र 39 अंक प्राप्त हुए हैं, जिसके चलते इसे ‘D’ ग्रेड दिया गया है। रेटिंग में इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजहें खराब योजना, कमजोर वित्तीय प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) की निगरानी में भारी कमियां बताई गई हैं।
रैंकिंग की कड़वी सच्चाई (Grim Reality)
रिपोर्ट में RERC की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर खुलासे किए गए हैं:
- संसाधन पर्याप्तता (Resource Adequacy): राजस्थान ने इस श्रेणी में 32 में से 0 अंक प्राप्त किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे प्रदेश का पावर ग्रिड मांग बढ़ने या आपूर्ति कम होने की स्थिति में पूरी तरह असुरक्षित हो गया है।
- डिस्कॉम की माली हालत: जयपुर और अजमेर डिस्कॉम का वित्तीय घाटा ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। वित्तीय स्वास्थ्य की श्रेणी में आयोग को 25 में से केवल 5 अंक मिले हैं।
- नवीकरणीय ऊर्जा: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में आयोग ने 15 में से केवल 9 अंक प्राप्त किए। नवीकरणीय खरीद दायित्वों (RPOs) को पूरा न करने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाने में भी आयोग विफल रहा है।
नियोजन और प्रबंधन में बड़ी खामियां
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि RERC मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने के लिए ‘प्लानिंग रिजर्व मार्जिन’ तय करने में विफल रहा है। इसके अलावा, ट्रांसमिशन और वितरण उपयोगिताओं (Utilities) के लिए अनिवार्य तीन साल की पूंजीगत व्यय योजना (Capex Plan) को मंजूरी नहीं दी गई, जिससे बुनियादी ढांचे का विस्तार और अपग्रेडेशन का काम अटक गया है।
क्या होगा इसका असर?
राष्ट्रीय रैंकिंग में इस निचले स्तर पर आने का सीधा असर प्रदेश की बिजली व्यवस्था और भविष्य के निवेश पर पड़ सकता है। टैरिफ आदेशों में देरी और ‘ट्रू-अप’ एडजस्टमेंट की समस्याओं ने डिस्कॉम के वित्तीय संकट को और गहरा दिया है। जानकारों का मानना है कि यदि जल्द ही सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश में बिजली संकट और गहरा सकता है।
