जयपुर | राजस्थान में राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माने जाने वाले पावर प्लांट्स के बीमा को लेकर एक बड़ा और विवादास्पद फैसला लिया गया है। अब तक केवल सरकारी कंपनियों के दायरे में रहने वाले इन प्लांट्स के बीमा में पहली बार निजी कंपनियों और प्राइवेट ब्रोकर्स को प्रवेश की अनुमति दे दी गई है।
9 पावर प्लांट्स, ₹41,852 करोड़ का बीमा
प्रदेश के 9 प्रमुख पावर प्लांट्स, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 8,180 मेगावाट है, उनके 41,852 करोड़ रुपये के बीमा के लिए यह नई प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इन प्लांट्स में कोटा, कालीसिंध, रामगढ़, धौलपुर, गिरल, सूरतगढ़ और छबड़ा के सरकारी पावर प्लांट शामिल हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर उठ रहे सवाल
विशेषज्ञों और रिपोर्ट के अनुसार, पावर प्लांट्स का बीमा केवल एक वित्तीय सौदा नहीं है। इसके तहत प्लांट की बेहद संवेदनशील और रणनीतिक जानकारी बीमा कंपनी और ब्रोकर्स के साथ साझा करनी पड़ती है।
- डेटा सुरक्षा: क्या निजी और विदेशी ब्रोकर्स के पास यह डेटा सुरक्षित रहेगा?
- वैश्विक उदाहरण: अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान बिजली संयंत्रों पर साइबर हमलों का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों ने इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम भरा बताया है।
- एंटी-टेररिज्म कवर: ये प्लांट्स हर साल अलग से टेररिज्म कवर पॉलिसी भी लेते हैं, जिससे इनकी संवेदनशीलता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
4 बार बदला गया टेंडर, क्या है इसके पीछे का गणित?
इस पूरे मामले में टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
- साल 2026-27 के लिए पहले लिमिटेड टेंडर निकाला गया था जिसमें केवल सरकारी कंपनियां शामिल हो सकती थीं।
- टेंडर की तारीख को 4 बार बढ़ाया गया। 3. अंततः 2 फरवरी 2026 को पुरानी प्रक्रिया निरस्त कर नया ओपन टेंडर निकाला गया, जिससे निजी कंपनियों के लिए रास्ते खुल गए।
- अब तकनीकी बिड में सरकारी कंपनियों के साथ 6 निजी कंपनियां भी योग्य मानी गई हैं।
विदेशी ब्रोकर्स को मोटा कमीशन!
हैरानी की बात यह है कि जो बीमा प्रक्रिया अब तक सरकारी अधिकारी खुद करते थे, उसके लिए अब प्राइवेट ब्रोकर्स (जिनमें अमेरिकी कंपनी मार्श, गैलाघर और भारतीय कंपनी सालसार शामिल हैं) को बड़ी रकम दी जाएगी। पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि प्रीमियम के मुकाबले क्लेम की राशि काफी अधिक रही है (जैसे 2025-26 में ₹63.47 करोड़ प्रीमियम के मुकाबले ₹176.58 करोड़ का क्लेम हुआ)।
पक्ष-विपक्ष: क्या कहते हैं जिम्मेदार?
“निजी कंपनियों से क्लेम लेना मुश्किल हो सकता है” “पावर प्लांट्स रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। अब तक सरकारी कंपनियों से बिना ब्रोकर काम होता था, जिससे प्रीमियम और क्लेम में पारदर्शिता रहती थी। निजी कंपनियों के साथ यह प्रक्रिया जटिल हो सकती है।” — पी.एन. सिंघल, भूतपूर्व सीएमडी, आरवीयूएनएल
“प्रतियोगिता बढ़ाने के लिए लिया फैसला” “निजी कंपनियों के रिप्रजेंटेशन के कारण हमने टेंडर को ओपन रखने का निर्णय लिया ताकि ज्यादा कंपटीशन हो। टीम को मजबूत करने के लिए ब्रोकर्स की मदद ली जा रही है।” — देवेन्द्र श्रृंगी, सीएमडी, आरवीयूएनएल
