अजमेर: राजस्थान के अजमेर स्थित राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान संस्थान (तबीजी) में शनिवार को ‘मसाला औद्योगिक संगोष्ठी एवं किसान मेला-2026’ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही मसालों की भूमि रहा है और आज हमारे जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी और अजवाइन जैसे मसालों की सुगंध विश्वभर में निर्यात को मजबूती दे रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और उद्योग जगत का सहयोग एक साथ मिले, तो बीजीय मसालों की खेती किसानों के लिए समृद्धि का सबसे बड़ा द्वार खोल सकती है।
नागौरी पान मेथी और लाल मिर्च पर होगा विशेष शोध

कार्यक्रम के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट ने हाड़ौती और मारवाड़ के किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:
- नागौरी पान मेथी: अब स्थानीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र की सूची में ‘नागौरी पान मेथी’ को भी शामिल किया जाएगा, जिससे इस पर विशेष शोध हो सकेगा।
- कोटा बनेगा हब: धनिया के बीजों के लिए कोटा को एक बड़ा हब बनाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि बीज आयात करने की निर्भरता खत्म हो सके।
- अजमेर में जैविक केंद्र: अजमेर में प्राकृतिक और जैविक खेती से मसाला उत्पादन का उत्कृष्ट केंद्र (Centre of Excellence) बनने की प्रबल संभावनाएं हैं।
- जलवायु अनुकूल किस्में: बदलती मिट्टी (क्षारीय और अम्लीय) और बढ़ती गर्मी को देखते हुए ऐसी नई किस्में विकसित की जाएंगी जो इन चुनौतियों को झेल सकें।
“वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और किसानों के बीच समन्वय को मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है, ताकि नई तकनीकें प्रयोगशाला से सीधे खेतों तक तेजी से पहुँच सकें और किसान लाभान्वित हों।”
— भागीरथ चौधरी, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री
प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर ध्यान देने की अपील
मंत्री श्री चौधरी ने किसानों से आग्रह किया कि वे केवल उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि प्रसंस्करण (Processing) और मूल्य संवर्धन (Value Addition) की दिशा में भी कदम बढ़ाएं。 उन्होंने कार्यक्रम में नई बीज प्रसंस्करण सुविधा का उद्घाटन किया और तकनीकी पुस्तिकाओं का विमोचन कर किसानों को उन्नत बीजों के पैकेट वितरित किए। स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. पी. एस. चौहान और अटारी जोधपुर के निदेशक डॉ. जे.पी. मिश्रा ने भी उद्योगों को सीधे किसानों से जोड़ने और जोधपुर में जीरा उत्पादन के ‘क्लस्टर’ बनाने पर बल दिया।
किसान कल्याण योजनाओं का उल्लेख
संबोधन के दौरान मंत्री ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना और कृषि सिंचाई योजना का जिक्र करते हुए कहा कि ये योजनाएं किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रही हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में देशभर से आए कृषि विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लेकर फसल विविधता अपनाने का संकल्प लिया।
प्रमुख घोषणाएं और योजनाएं: एक नजर में
| परियोजना/विषय | मुख्य लक्ष्य एवं उद्देश्य |
| कोटा धनिया हब | धनिया बीज के आयात को खत्म करना और कोटा को निर्यात का केंद्र बनाना। |
| नागौरी पान मेथी | अनुसंधान सूची में शामिल कर उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाना। |
| जीरा क्लस्टर (जोधपुर) | जोधपुर में जीरे की नई प्रजातियों का सामूहिक प्रदर्शन और उत्पादन बढ़ाना। |
| अजमेर ऑर्गेनिक सेंटर | प्राकृतिक खेती के माध्यम से मसालों के उत्पादन का उत्कृष्ट केंद्र बनाना। |
| बीज प्रसंस्करण | तबीजी संस्थान में नई बीज प्रसंस्करण सुविधा की शुरुआत। |
