करौली। जिले में बाल श्रम के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। बाल अधिकारिता विभाग के नवनियुक्त सहायक निदेशक पवन बंसल के पदभार संभालते ही विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। शनिवार को टीम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में दबिश देकर बालश्रम कर रहे 10 नाबालिग बच्चों को मुक्त कराया।
हेल्पलाइन की सूचना पर हुई कार्रवाई
सहायक निदेशक पवन बंसल ने बताया कि शनिवार को चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) पर कुछ बच्चों से बालश्रम कराए जाने की गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें कोतवाली थाना पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन के सदस्यों को शामिल किया गया।
इन इलाकों में दी गई दबिश
संयुक्त टीम ने करौली के विभिन्न व्यावसायिक केंद्रों पर अचानक छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान इन स्थानों से बच्चों को रेस्क्यू किया गया:
- तीन बड़ और बस स्टैंड क्षेत्र
- शिकारगंज और मुरलीपुरा
- पुराना ट्रक यूनियन (चंद्र होटल के पास)
इन स्थानों पर बच्चे बाइक रिपेयरिंग और ट्रक रिपेयरिंग जैसी दुकानों पर काम करते हुए पाए गए।
अभिभावकों को दी गई कड़ी चेतावनी
रेस्क्यू किए गए सभी 10 बालकों को बाल कल्याण समिति के सदस्य दिलीप कुमार मीणा के समक्ष पेश किया गया। टीम ने बच्चों के सर्वोत्तम हित को सर्वोपरि रखते हुए उनके अभिभावकों को बुलाकर काउंसलिंग की। अभिभावकों को बच्चों को श्रम के बजाय शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रेरित किया गया और भविष्य में बाल श्रम न कराने के लिए कानूनी रूप से पाबंद किया गया।
टीम में ये रहे शामिल: इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में कांस्टेबल सचिन, चाइल्ड हेल्पलाइन से भीकम सिंह, हिमांशु शर्मा, देवेंद्र कुमार व्यास, राजेंद्र सिंह, नलेश कुमार बेरवा और हीरालाल का विशेष सहयोग रहा।
