जयपुर | जल जीवन मिशन (JJM) के नाम पर राजस्थान की प्यासी जनता की गाढ़ी कमाई डकारने वाले सफेदपोशों के चेहरों से अब नकाब उतरना शुरू हो गया है। ‘Expose Now’ आपको बता रहा है उस ‘पहुंच’ वाली फरारी की इनसाइड स्टोरी, जिसने पिछले 17 दिनों से भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की नींद उड़ा रखी है। जल जीवन मिशन घोटाले के मुख्य किरदार और पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल को लेकर पहले चर्चाएं थीं कि वे विदेश भाग चुके हैं, लेकिन ACB की गहन पड़ताल यह साफ कहती है कि साहब अभी ‘देश’ की ही माटी पर हैं!
एयरपोर्ट के फुटेज से खुलासा: ‘साहब’ उड़े नहीं, बस छिप गए!
भ्रष्टाचार की इस ‘शतरंज’ के माहिर खिलाड़ी रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल के बारे में कयास लगाए जा रहे थे कि वे सरहद पार कर चुके होंगे। लेकिन ‘Expose Now’ को मिले पुख्ता अपडेट के मुताबिक, ACB ने जयपुर और दिल्ली एयरपोर्ट के पिछले एक महीने के CCTV फुटेज पूरी तरह खंगाल डाले हैं। नतीजा यह निकला कि इन फुटेज में सुबोध अग्रवाल की कोई एंट्री नहीं मिली। इसका सीधा मतलब है कि 18 फरवरी को जारी हुआ ‘लुकआउट नोटिस’ काम कर गया है और ‘साहब’ देश की सीमाओं के भीतर ही जांच एजेंसियों के साथ चूहे-बिल्ली का खेल खेल रहे हैं।
4 टीमें, 4 राज्य और 50 गवाहों से ‘थर्ड डिग्री’ पूछताछ
ACB की 4 टीमें इस समय राजस्थान से लेकर नोएडा (उत्तर प्रदेश) और महाराष्ट्र तक खाक छान रही हैं। सूत्रों के हवाले से मिली बड़ी जानकारी के अनुसार, अग्रवाल के रिश्तेदारों, करीबियों और पुराने ड्राइवरों समेत 50 से अधिक लोगों को हेडक्वार्टर बुलाकर कड़ी पूछताछ की गई है। जांच एजेंसियां अब विशेष रूप से उनके उन करीबियों पर नजर रख रही हैं, जो उन्हें ‘लॉजिस्टिक सपोर्ट’ या छिपने में मदद मुहैया करवा रहे हैं।
अपनों की ‘छतरी’ और डिजिटल फुटप्रिंट किए गायब
JJM घोटाले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, भ्रष्टाचार का एक पूरा ‘सिस्टम’ सामने आ रहा है। ‘Expose Now’ की खास पड़ताल के अनुसार, यह सिर्फ एक अधिकारी का खेल नहीं था, बल्कि इसमें रसूखदार ठेकेदारों और फर्जीवाड़े में माहिर फर्मों की पूरी फौज शामिल थी। इनसाइड स्टोरी के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- रसूखदारों की पनाह: सूत्रों के मुताबिक, सुबोध अग्रवाल किसी पड़ोसी राज्य में एक बेहद रसूखदार सफेदपोश के ‘सेफ हाउस’ में पनाह लिए हुए हैं।
- कोई डिजिटल सुराग नहीं: उन्होंने अपने तमाम मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस पूरी तरह बंद कर रखे हैं, जिससे उनका लोकेशन ट्रेस करना एजेंसियों के लिए मुश्किल हो रहा है।
- कानूनी ढाल की तैयारी: ‘साहब’ के घर पर ताले लटके हैं और रसूखदार रिश्तेदार मौन हैं। लेकिन फरार रहते हुए ही देश के नामी वकीलों के जरिए ‘अग्रिम जमानत’ की बिसात भी बिछाई जा रही है।
‘कागज के शेर’ और ‘फर्जी सर्टिफिकेट’ का खेल!
इस पूरे खेल में उन मुख्य आरोपी कंपनियों और ठेकेदारों का नाम भी सामने आया है, जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों के टेंडर हथियाए। इनमें दो फर्मों का नाम सबसे ऊपर है:
- श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी (पदमचंद जैन): इस फर्म पर इरकॉन (IRCON) के फर्जी वर्क कंप्लीशन सर्टिफिकेट का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप है। बिना काम किए या घटिया काम के आधार पर इन्होंने करोड़ों रुपये के भुगतान उठाए। ठेकेदार पदमचंद जैन को इस पूरे मामले में मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है।
- गणपति ट्यूबवेल कंपनी (महेश मित्तल): इस कंपनी ने भी फर्जी कागजात लगाकर विभाग को करोड़ों का चूना लगाया है।
जनता का सवाल: आखिर कब तक ‘लुकआउट’ का सहारा?
JJM घोटाला सिर्फ पैसों की हेराफेरी नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के लाखों ग्रामीणों के पानी के हक पर पड़ा एक बड़ा डाका है। ‘Expose Now’ यह सवाल उठाता है कि आखिर एक रिटायर्ड अधिकारी सिस्टम की आंखों में इतनी धूल कैसे झोंक रहा है? क्या उन्हें विभाग के ही किसी ‘विभीषण’ का साथ मिल रहा है? CCTV कैमरों ने यह कन्फर्म कर दिया है कि अपराधी अभी इसी मिट्टी पर है, अब देखना यह है कि ACB के हाथ उन तक कब पहुंचते हैं।
