जयपुर: राजधानी जयपुर की चित्रकूट थाना पुलिस ने शिक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले एक शातिर जालसाज अभिमन्यु जाखड़ (40) को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने न केवल फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक से 18 करोड़ रुपये का लोन उठाया, बल्कि एक प्रतिष्ठित शिक्षा समिति के असली पदाधिकारियों को हटाकर उस पर अवैध कब्जा भी कर लिया। 9 फरवरी को आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे 4 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
कैसे रची गई पूरी साजिश?
पुलिस जांच और पीड़ित शीशराम द्वारा दर्ज कराई गई FIR (जून 2025) के अनुसार, आरोपी ने बेहद शातिराना तरीके से इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया:
- फर्जी इस्तीफे और हस्ताक्षर: आरोपी ने समिति के तत्कालीन अध्यक्ष शीशराम और उनकी बेटी के नाम से फर्जी इस्तीफा पत्र तैयार किए और उन पर जाली हस्ताक्षर किए।
- अपनों को पहुँचाया फायदा: असली पदाधिकारियों को हटाकर आरोपी ने अपने ही मामा रणजीत गोदारा को अवैध रूप से समिति का नया अध्यक्ष बना दिया। इसके लिए न कोई चुनाव हुआ और न ही सदस्यों की सहमति ली गई।
- बैंक को बनाया शिकार: आरोपी ने पीड़ितों को गुमराह कर उनकी लीज की जमीन पर 18 करोड़ रुपये का लोन ले लिया। उन्हें बिना बताए ही बैंक दस्तावेजों में आवेदक और गारंटर बना दिया गया था।
सरकारी पोर्टल से छेड़छाड़ (Hacking the System)
आरोपी ने केवल कागजों पर ही नहीं, बल्कि डिजिटल स्तर पर भी धोखाधड़ी की। उसने अपनी लॉगिन आईडी का उपयोग कर सहकारिता विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर फर्जी दस्तावेज अपलोड कर दिए। इसके चलते सरकारी रिकॉर्ड में भी प्रबंधन का परिवर्तन दर्ज हो गया, जिससे यह घोटाला लंबे समय तक छिपा रहा।
पुलिस जांच में खुले चौंकाने वाले राज
एसीपी (आदर्श नगर) लक्ष्मी सुथार के नेतृत्व में हुई जांच में सामने आया कि:
- फर्जी स्टांप पेपर: जिन स्टांप पेपरों पर इस्तीफे और समझौते दिखाए गए, वे सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं थे।
- संगठित नेटवर्क: पुलिस को अंदेशा है कि इस बड़े खेल में बैंक अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है।
वर्तमान स्थिति:
थानाधिकारी प्रभु सिंह के अनुसार, पुलिस अब रिमांड के दौरान यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि 18 करोड़ की मोटी रकम कहाँ खर्च की गई और इस साजिश में और कौन-कौन से ‘सफेदपोश’ चेहरे शामिल हैं।
